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आईबीसी के लिए उपलब्ध होगा एकीकृत पोर्टल, चल रहा काम

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वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ‘हमारे पास सच का एक ही स्रोत होगा। मामला-वार सभी जानकारी इस पोर्टल के जरिये प्रवाहित होगी।

Last Updated- December 25, 2023 | 2:21 PM IST
IBC Cases
Representative Image

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में ऐसे एकीकृत पोर्टल पर काम चल रहा है, जो मामले की जानकारी के निर्बाध प्रवाह के लिए ऋणशोधन अक्षमता और दिवाला संहिता (आईबीसी) के सभी स्तंभों को एक साथ लाएगा। मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ‘हमारे पास सच का एक ही स्रोत होगा। मामला-वार सभी जानकारी इस पोर्टल के जरिये प्रवाहित होगी। इससे हमें नीति निर्धारण में सुधार के लिए डेटा विश्लेषण में भी सहायता मिलेगी।’

पोर्टल के लिए अवधारणा पत्र तैयार है और मंत्रालय इसे आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही किसी सलाहकार को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

यह पोर्टल भारतीय ऋणशोधन अक्षमता और दिवाला बोर्ड (आईबीबीआई), राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी), राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सर्विसेज लिमिटेड के साथ-साथ समाधान पेशेवरों और सूचना उपयोगिता को एक मंच प्रदान करेगा।

उदाहरण के लिए समाधान पेशेवर एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस का इस्तेमाल करते हुए कंपनी की दिवाला प्रक्रिया के हिस्से के बारे में एमसीए डेटा तक पहुंचने में सक्षम होंगे।

आईबीबीआई इस पोर्टल के जरिये एनसीएलटी में होने वाली घटनाओं पर भी नजर रख सकेगा। दोनों संस्थाओं के डेटा में अंतर नहीं होगा क्योंकि जानकारी एक ही स्थान पर दर्ज की जाएगी।

फिलहाल आईबीबीआई अपने त्रैमासिक समाचार पत्रों के जरिये कुछ प्रमुख पहलुओं के संबंध में जानकारी प्रदान करता है जैसे – स्वीकृत मामले; अनुमोदन, परिसमापन, निपटान या वापस लिए जाने से बंद किए गए मामले।

केएस लीगल ऐंड एसोसिएट्स के प्रबंध साझेदार सोनम चंदवानी ने कहा ‘ऐसी प्रणाली महत्त्वपूर्ण रूप से त्रुटियों और गलत सूचनाओं की गुंजाइश कम कर सकती है, जो आम तौर पर विभाजित डेटा प्रबंधन से पैदा होती हैं। दिवाला समाधानों की तेज रफ्तार, अधिक जोखिम वाली दुनिया में, जहां हर दिन मायने रखता है, सूचना की रफ्तार और सटीकता सुधार दर और वित्तीय प्रणाली के समग्र सेहत पर खासा असर डाल सकती है।’

अधिकारी ने कहा कि इस पोर्टल में एसएमएस अलर्ट की सुविधाएं शामिल होंगी और यह एनसीएलटी के लिए समय बचाने के लिए टेम्पलेट-आधारित निर्णय प्रदान करेगा और फैसला करने के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस लर्निंग का इस्तेमाल करेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसी बहुत सारी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाए, तो यह न केवल वा णि ज्यिक, बल्कि शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए भी उपयोगी हो सकती है।

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First Published - December 25, 2023 | 2:21 PM IST

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