उद्योग

भारत में स्क्रैप स्टील की कमी, आयात ने रफ्तार पकड़ी

भारत में लौह और स्टेनलेस स्टील स्क्रैप की घरेलू उपलब्धता सीमित होने के कारण आयात में तेज़ी आई है।

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साकेत कुमार   
Last Updated- December 23, 2025 | 9:04 AM IST

भारत का लौह स्क्रैप आयात इस वित्त वर्ष में तेजी से बढ़ा जबकि यह अक्टूबर में स्थिर रहा। यह स्क्रैप आधारित इस्पात निर्माण के लिए विदेश से आपूर्ति की निरंतर निर्भरता की ओर इशारा करता है।

एमजंक्शन सर्विसेज के प्रमुख व छोटे बंदरगाहों से संकलित आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान संचयी आयात 56.95 लाख टन तक बढ़ गया जबकि एक साल पहले यह 39.32 लाख टन  था। अक्टूबर में लौह स्क्रैप 6.87 लाख टन था और यह सितंबर के 6.92 लाख टन से मामूली रूप से कम था। हालांकि अक्टूबर में बीते साल के इस माह की तुलना में आयात 24 प्रतिशत बढ़कर 5.53 लाख टन अधिक था।

आंकड़ों में स्टेनलेस स्टील स्क्रैप के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि भी दिखाई गई। इसका आयात एक साल पहले के 4.88 लाख टन के दोगुने से अधिक  10.55 लाख टन हो गया है। अप्रैल-अक्टूबर की अवधि में भारत के अनुमानित लौह स्क्रैप की आवश्यकता लगभग 229.56 लाख टन थी जबकि घरेलू उपलब्धता लगभग 179.55 लाख टन आंकी गई थी। यह मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निरंतर निर्भरता को दर्शाता है। एमजंक्शन के प्रबंध निदेशक व सीईओ विनय वर्मा ने कहा कि एक सपाट प्रवृत्ति अपने से घरेलू लौह स्क्रैप की उपलब्धता या सोर्सिंग में महत्त्वपूर्ण वृद्धि का संकेत नहीं देती है।

अपेक्षाकृत युवा वाहन बेड़े और सीमित बड़े पैमाने पर संगठित स्क्रैप प्रसंस्करण के कारण घरेलू उत्पादन ढांचागत रूप से बाधित है। इसका अर्थ है कि बाजार अंतर को पाटने के लिए आंशिक रूप से आयात पर निर्भर करता है।

First Published : December 23, 2025 | 9:04 AM IST