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इंडिगो ने मांगा ₹900 करोड़ का कस्टम रिफंड, मरम्मत के बाद दोबारा ड्यूटी वसूली पर कोर्ट पहुंची एयरलाइन

इंडिगो द्वारा मरम्मत के बाद लौटे विमान इंजनों पर दोबारा सीमा शुल्क लगाए जाने को चुनौती दी गई है और 900 करोड़ रुपये की रिफंड याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गई है

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भाविनी मिश्रा   
Last Updated- December 12, 2025 | 10:16 PM IST

इंडिगो की संचालक इंटरग्लोब एविएशन ने दिल्ली उच्च न्यायालय से गुहार की है कि उसे विदेशों में मरम्मत के बाद दोबारा भारत लाए गए विमान इंजन और उसके पुर्जों पर सीमा शुल्क के रूप में भुगतान किया गया पैसा वापस दिलाया जाए। यह रकम 900 करोड़ रुपये से अधिक होती है।

यह याचिका न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और शैल जैन के पीठ के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई के लिए आई थी, लेकिन न्यायमूर्ति जैन ने अपने बेटे के इंडिगो में पायलट के रूप में कार्यरत होने का हवाला देते हुए मामले से खुद को अलग कर लिया। मुख्य न्यायाधीश के निर्देशों के अनुसार, मामला अब किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। एयरलाइन की ओर से पेश अधिवक्ता वी. लक्ष्मीकुमारन ने तर्क दिया कि मरम्मत के बाद पुन: आयात पर सीमा शुल्क लगाना दोहरे लेवी के समान है। इसलिए यह असंवैधानिक है।

उन्होंने कहा कि इंडिगो ने बिना किसी विरोध के पुन: आयात के समय बुनियादी सीमा शुल्क का भुगतान पहले ही कर दिया था, इसके अलावा रिवर्स चार्ज आधार पर माल और सेवा कर (जीएसटी) भी दिया, क्योंकि मरम्मत एक सेवा के रूप में आता है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सीमा शुल्क अधिकारियों ने कथित तौर पर पुन: आयातित वस्तुओं को ताजा आयात मानते हुए और भी शुल्क मांगा।

एयरलाइन ने बताया कि सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईएसटीएटी) ने पहले स्पष्ट किया था कि मरम्मत किए गए पुन: आयात पर दोबारा शुल्क नहीं लगाया जा सकता है।

First Published : December 12, 2025 | 10:07 PM IST