देश की नागरिक उड्डयन नियामक संस्था DGCA ने शनिवार को IndiGo के CEO Pieter Elbers को शो कॉज नोटिस जारी किया। नियामक ने उनसे 24 घंटे में यह बताने के लिए कहा है कि एयरलाइन के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। DGCA ने कहा कि कंपनी समय पर भरोसेमंद उड़ान संचालन सुनिश्चित करने में विफल रही है।
IndiGo ने पिछले एक हफ्ते में हजारों उड़ानें रद्द कर दीं जिससे देश भर में यात्रियों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी। उड़ानें रद्द होने के बाद अन्य एयरलाइनों की टिकट कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई और सरकार को दखल देना पड़ा।
IndiGo ने कहा कि नए नियमों के चलते पायलटों के काम के घंटे सीमित होने से वे समय पर सही योजना नहीं बना पाए। यही वजह है कि दिसंबर के पीक सीजन में उन्हें बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
सरकार ने शुक्रवार को IndiGo को नए नियमों में अस्थायी राहत दी। यात्रियों की मदद के लिए अतिरिक्त ट्रेनें भी चलाई गईं। इसके अलावा किराए पर रोक लगाने के लिए सरकार ने हवाई टिकटों की ऊपरी सीमा तय कर दी। 500 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए एकतरफा किराया अधिकतम 7500 रुपये और 1000 से 1500 किलोमीटर तक की उड़ान के लिए 15000 रुपये रखा गया। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि कई फ्लाइट्स में किराए बेहद बढ़ गए थे।
शुक्रवार को एक ही दिन में 1000 से ज्यादा IndiGo की उड़ानें रद्द हुईं। शनिवार को भी कई अहम शहरों में उड़ानें रद्द रहीं। बेंगलुरु में 124, मुंबई में 109, दिल्ली में 86 और हैदराबाद में 66 उड़ानें कैंसिल हुईं। कई यात्री हवाई अड्डों पर फंसे नजर आए और उन्हें अंतिम समय पर फ्लाइट रद्द होने की जानकारी मिली।
दिल्ली एयरपोर्ट ने सोशल मीडिया पर बताया कि फ्लाइट संचालन धीरे धीरे सामान्य हो रहा है लेकिन कई जगह अब भी रद्दीकरण जारी हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि वह रियल टाइम डेटा के जरिए किराए पर निगरानी बनाए रखेगा।
पायलट संगठनों ने IndiGo को मिली छूट का विरोध किया है। उनका कहना है कि सुरक्षा के नियम समझौते के लिए नहीं हैं। पायलट संघों ने सरकार को चेताया कि यह राहत केवल IndiGo को बचाने के लिए नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि नियम यात्रा सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।
IndiGo का यह संकट उसकी 20 साल की यात्रा में सबसे बड़ा बताया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि 10 से 15 दिसंबर के बीच संचालन सामान्य होने लगेगा।
(एजेंसी इनपुट के साथ)