ईवी वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रा तैयार करने पर सरकार देगी सब्सिडी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 3:31 PM IST

इलेक्ट्रिक वाहनों की आने वाले समय में मांग बढ़ने के आसार दिखाई दे रहे है। जिसके चलते ईवी विनिर्माताओं ने ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ईवी वाहनों को और बेहतर बनाने की आवश्कता बताई है। रिपोर्ट के अनुसार अभी देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का अनुपात मात्र एक प्रतिशत ही है लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि साल 2030 तक यह 30 प्रतिशत तक हो जाएगा।

अभी ईवी वाहनों के साथ जो बड़ी चुनौती सामने आ रही है वो है चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्यूफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME II) में बदलाव लाने पर काम कर रही है।
 
सरकार की योजना है कि उन कंपनियों को सब्सिडी दी जाए जो चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करेंगी। इसकी जानकारी केंद्रीय पॉवर सेक्रेटरी आलोक कुमार ने गुरुवार को दी।
 
जानकारी के मुताबिक देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सेट अप करने वाली कंपनियों को सब्सिडी दी जाएगी जिसे फिर स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को दिया जाएगा। 
 
कितनी मिलेगी सब्सिडी 
 
बता दें कि छोटे नगरों और शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सेटअप करने पर सब्सिडी दी जाएगी। कुमार ने बताया कि जो कंपनी 200 किलोवॉट का चार्जिंग इंफ्रा तैयार करेगी उसे 4-5 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। 
 
केंद्रीय पॉवर सेक्रेटरी के अनुसार तेल बेचने वाली कंपनियां जो नेशनल हाईवे के किनारे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का सेटअप लगाने की तैयारी कर रही हैं तो सब्सिडी का सबसे अधिक फायदा इन्हें मिलने की उम्मीद है। 
 
इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग सिस्टम 
 
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इलेक्ट्रिसिटी पर आधारित पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) की पैरवी शुरू कर दी है। गडकरी ने अपने विभाग के अधिकारियों को अलग-अलग कंपनियों की बनाई हुई इलेक्ट्रिक बसों के लिए समान चार्जिंग सिस्टम पर काम करने को कहा था। साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने के लिए भी कहा था।
 
गडकरी का ऐसा मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों से प्रदूषण भी कम होगा और तेल का आयात भी घटेगा।

First Published : September 16, 2022 | 11:53 AM IST