सरकार ने वोडाफोन आइडिया (वी) को आज बड़ी राहत दी है। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने कंपनी का समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाया 87,695 करोड़ रुपये पर रोक दिया है और संकट में घिरी कंपनी को यह रकम वित्त वर्ष 2031-32 और 2040-41 के बीच चुकाने की इजाजत दे दी है। सूत्रों ने बताया कि यह बकाया राशि 31 दिसंबर, 2025 यानी आज तक की है और इसे आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। मगर दूरसंचार विभाग कटौती सत्यापन दिशानिर्देश (डीवीजी) के तहत एक बार फिर इस बकाये का आकलन करेगा और सरकार द्वारा गठित समिति इस पर अंतिम निर्णय लेगी।
मार्च 2020 में पहली बार इस्तेमाल डीवीजी आंतरिक मानक संचालन प्रक्रिया है और दूरसंचार विभाग के सभी फील्ड अधिकारी दूरसंचार ऑपरेटरों के सकल राजस्व में से कटौती के दावों का सत्यापन करने के लिए इसी का उपयोग करते हैं। इसके बाद ही एजीआर तय किया जाता है।
इस खबर के बाद वी का शेयर करीब 11.53 फीसदी लुढ़ककर बंद हुआ। एक्सचेंज को दिए अपने बयान में वोडाफोन आइडिया ने कहा कि उसे प्रस्तावित माफी के बारे में अभी सरकार से कोई सूचना नहीं मिली है। कंपनी ने कहा, ‘जब भी कुछ ऐसा होता है, जिसके खुलासे की जरूरत पड़ी तो हम जरूर बताएंगे। हालांकि सूत्रों ने बताया कि कंपनी को वित्त वर्ष 2017-18 से 2018-19 के लिए एजीआर बकाये का भुगतान 2025-26 से 2030-31 के बीच करना होगा।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘इससे वोडाफोन आइडिया में सरकार की 49 फीसदी हिस्सेदारी के हितों की रक्षा होगी, साथ ही समय पर बकाये का भुगतान भी हो सकेगा। इस समयसीमा में कंपनी खुद को फिर से खड़ा कर पाएगी और अपने लिए निवेश भी तलाशने में सक्षम हो सकती है।’
वर्तमान में वोडाफोन आइडिया पर सरकार का कुल 83,400 करोड़ रुपये एजीआर बकाया है। उम्मीद थी कि मार्च 2026 से वह 18,000 करोड़ रुपये का सालाना भुगतान शुरू कर देगी। उच्चतम न्यायालय द्वारा वित्त वर्ष 2016-17 तक के वोडा आइडिया के एजीआर बकाये का पुनर्मूल्यांकन करने की अनुमति मिलने के बाद सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया है।
अदालत ने 27 अक्टूबर के आदेश को संशोधित करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार कर्ज में डूबी कंपनी के पूरे एजीआर बकाये पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है न कि सिर्फ 9,450 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग पर, जिसमें से 5,606 करोड़ रुपये 2016-17 से संबंधित हैं।
वी ने कहा कि उसने अपने प्रवर्तक समूह वोडाफोन ग्रुप के साथ संशोधित करार किया है ताकि वोडाफोन इंडिया और आइडिया के 2017 के विलय से जुड़ी 5,386 करोड़ रुपये तक की देनदारी वसूली जा सके। यह देनदारी विलय के बाद भविष्य में होने वाले किसी भी कानूनी, कर या नियामकीय बकाये से जुड़ी है।
इस रकम में से वोडाफोन ग्रुप और प्रवर्तक अगले 12 महीनों में भारतीय इकाई को 2,307 करोड़ रुपये नकद देंगे। इसके अलावा वोडाफोन ग्रुप के शेयरधारक 5 साल के लिए वोडाफोन आइडिया के 3.28 अरब शेयर भी अलग रखेंगे, जिन्हें कंपनी के कहने पर बेचा जा सकता है।