सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (एनसीएलटी) को फ्यूचर रिटेल और रिलायंस के करीब 24,713 करोड़ रुपये (3.4 अरब डॉलर) के सौदे पर अंतिम फैसला देने से रोक दिया है। अदालत मामले में यथास्थिति बनाए रखने के एकल पीठ के फैसले पर रोक लगाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एमेजॉन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उसने याचिका पर फ्यूचर रिटेल से जवाब भी मांगा।
न्यायमूर्ति रोहिंटन नरीमन की अध्यक्षता वाले पीठ ने यह भी कहा कि एनसीएलटी में मामले की सुनवाई जारी रह सकती है लेकिन सौदे पर अंतिम आदेश नहीं दिया जा सकता। फ्यूचर रिटेल को नोटिस जारी करते हुए पीठ ने कहा कि वे एमेजॉन की याचिका पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दें और इसके दो सप्ताह बाद प्रतिउत्तर दिया जाए और फिर एमेजॉन की याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इस बीच एनसीएलटी में सुनवाई जारी रखने की अनुमति होगी लेकिन सौदे पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय का खंडपीठ इस मामले में आगे सुनवाई नहीं करेगा।
जेफ बेजोस के नेतृत्व वाली एमेजॉन का लंबे समय से किशोर बियाणी की अगुआई वाली फ्यूचर रिटेल के साथ कानूनी विवाद चल रहा है। एमेजॉन का आरोप है कि फ्यूचर उसके साथ किए गए समझौते का उल्लंघन कर रही है और अपनी रिटेल संपत्तियां मुकेश अंबानी की रिलायंस को बेचने के लिए समहत हो गई है। लेकिन फ्यूचर का कहना है कि उसने किसी समझौते का उल्लंघन नहीं किया है।
टेकलेजिस एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर के मैनेजिंग पार्टनर सलमान वारिस ने कहा, ‘शीर्ष अदालत ने एमेजॉन की याचिका पर फ्यचूर रिटेल और अन्य को नोटिस जारी किया है और एनसीएलटी को फ्यूचर रिटेल सौदे को मंजूरी का अंतिम आदेश देने से मना किया है।’
टेकलेजिस एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर के मैनेजिंग पार्टनर सलमान वारिस ने बताया कि सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पंचाट का अंतिम आदेश सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का आधार बना है। अब फ्यचूर रिटेल सिंगाुपर मध्यस्थता पंचाट जा सकती है और आपात मध्यस्थता आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग कर सकती है। वारिस ने कहा कि अदालत ने फ्यूचर रिटेल से लिखित जवाब मांगा है और पांच हफ्ते बाद इस मामले की सुनवाई की बात कही है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दिया था, जिससे एमेजॉन को झटका लगा था। इसलिए उसने सर्वोच्च न्यायालय में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दायर की है। दिल्ली उच्च न्यायालय के खंडपीठ ने अपने आदेश में जिक्र किया था कि एमेजॉन के साथ मध्यस्थता समझौते में फ्यूचर रिटेल पक्ष नहीं थी और प्रथम दृष्टया मौजूदा मामले में समूह की कंपनियों के सिद्घांत को लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि तीनों समझौते – फ्यूचर रिटेल शेयरधारिता समझौता, फ्यूचर कूपन्स और एफसीपीएल शेयर खरीद समझौता अलग-अलग किस्म के थे। खंडपीठ ने पाया कि सौदे पर यथास्थिति की मांग करने की कोई वजह नहीं है। उसने यह भी कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड तथा भारतीय प्रतिस्पद्र्घा आयोग को कानून के अनुसार आगे कार्यवाही करने से रोका नहीं जा सकता।