बीएस बातचीत
फ्लिपकार्ट समूह के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति नियमित रूप से योग करते हैं। देशबंदी के बाद कामकाज बढऩे पर इससे कृष्णमूर्ति को इससे शांत रहने और भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी पर ध्यान रखने में मदद मिलती है। पीरजादा अबरार के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि कोविड-19 से कंपनी को सबसे बड़ी सीख यह मिली है कि तात्कालिक स्थिति से तालमेल और स्थिति के मुताबिक बदलाव कैसे किया जाए। संपादित अंश…
लॉकडाउन के दौरान कारोबार जारी रखने और कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा रखने को लेकर आपकी क्या रणनीति रही?
फ्लिपकार्ट की शीर्ष की टीम ने एकजुट होकर सबसे पहले इस सवाल का जवाब तलाशने की कवायद की कि लॉकडाउन किस तरह से हमारे हिस्सेदारों को प्रभावित करेगा और हमारी जवाबदेही क्या होगी। इसमें कर्मचारी, ग्राहक, विक्रेता और विक्रेताओं को आपूर्ति करने वाले ब्रांड व सरकारें शामिल हैं। हमारे दिमाग में सबसे प्रमुख बात कर्मचारियों की नौकरियों की सुरक्षा थी। सभी प्रमुखों ने अपनी टीम के साथ बात की और उन्हें साफ संदेश दिया कि नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है और कंपनी आपके साथ है। हमने अपने ग्राहकों के बारे में विचार किया, जिन्हें आवश्यक जिंसों के बाधारहित आपूर्ति की जरूरत थी, जो सुरक्षित हो। विक्रेताओं को नकदी की चिंता थी, उन्हें हमने आश्वस्त किया।
फ्लिपकार्ट सहित ई-कॉमर्स व खुदरा उद्योग पर कोविड-19 व लॉकडाउन का क्या असर रहा है?
साफ है कि खपत प्रभावित हुई है। कौन जानता है कि यह कम समय रहेगा, 6 महीने रहेगा, या दो साल चलेगा। घरेलू खपत में सबसे बड़ी चीज हम जरूरी वस्तुओं की परिभाषा में बदलाव देख रहे हैं। लोग घर से काम कर रहे हैं और बाहर कम खा रहे हैं। ऐसे में निश्चित रूप से एक ही घर में अब कई स्क्रीन और कई उपकरणों की जरूरत है। फैशन के बारे में भी नजरिया बदल रहा है।
फ्लिपकार्ट ने सबसे पहले कर्मचारियों को वेतन कटौती या छंटनी न करने का आश्वासन दिया, जबकि ट्रेंड अलग है। क्या अभी भी आप अपने फैसले पर कायम हैं?
हमारे लिए कर्मचारियों के प्रति मित्रवत होना या कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील होना कोई पहल नहीं है। यह हमारी कंपनी की संस्कृति है। बड़ी संख्या में कर्मचारी फ्लिपकार्ट के मालिक भी हैं। हम अगले 20-23 साल के हिसाब से कंपनी बना रहे हैं, न कि सिर्फ इस महीने या अगले महीने के लिए।
सरकार ने खाद्य के खुदरा कारोबार में उतरने का फ्लिपकार्ट का आवेदन रद्द कर दिया, आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
हमारा मानना है कि इससे तकनीक व नवोन्मेष के माध्यम से अगले कुछ साल में भारत के किसानों को बड़ा फायदा मिल सकता है। यह देखकर बड़ी खुशी होती है कि माननीय प्रधानमंत्री व अन्य मंत्री किसानों के लाभ के लिए क्रांतिकारी सुधार कर रहे हैं। हम सिर्फ उसका हिस्सा बनना चाहते हैं। हमारे आवेदन को लेकर कुछ स्पष्टीकरण मांगा गया है और हम उस पर काम कर रहे हैं। हम फिर से आवेदन करेंगे, और सरकार को उस पर फैसला करना है। सरकार इस मसले पर जो भी फैसला करेगी, हम उसका स्वागत करेंगे।