कंपनियों की रिपोर्टों से पता चला है कि मई 2026 में ऑर्डर मिलने की दर में गिरावट आई है। यह मासिक और सालाना आधार- दोनों ही पैमाने पर कम रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के विश्लेषण के अनुसार मई के महीने में 39,100 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। इनमें अप्रैल की तुलना में 8 प्रतिशत की गिरावट रही। अप्रैल में लगभग 42,500 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले थे। आरव पटेल के लिखे एक नोट में बताया गया कि मई 2025 में मिले 68,000 करोड़ रुपये के ऑर्डरों की तुलना में भी इसमें 46 प्रतिशत की गिरावट रही। ये आंकड़े 13 महीने में सबसे कम हैं।
इक्रा की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख (कॉर्पोरेट रेटिंग) किंजल शाह ने कहा, ‘हाल की तिमाहियों में परियोजना मिलने की रफ्तार धीमी होने से सड़क डेवलपरों की ऑर्डर बुक पर असर पड़ा है।’ शाह के अनुसार अमेरिका-ईरान समझौते और मॉनसून की प्रगति के संबंध में और ज्यादा स्पष्टता आने से अगले महीने के दौरान मांग की स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है। सामान्य से कम मॉनसून की आशंका से ग्रामीण इलाकों से जुड़े क्षेत्रों – जैसे एफएमसीजी, दोपहिया वाहन, ट्रैक्टर और कृषि-रसायन में मांग घटने का जोखिम है।
उन्होंने कहा कि हालांकि स्थिर आय के रुझान शहरी खपत को कुछ हद तक सहारा दे सकते हैं, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की गिरावट के कारण महंगाई का दबाव बना रहेगा, जिससे खपत-आधारित क्षेत्रों में बिक्री वृद्धि सीमित हो सकती है और कुल मिलाकर मांग का माहौल चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।
सितंबर 2025 में सरकार के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरें घटाने के बाद मांग में सुधार होने लगा था। अप्रैल 2026 में कुछ अंतराल के बाद जारी की गई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तिमाही रिपोर्ट ‘ऑर्डर बुक्स, इन्वेंटरीज, ऐंड कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन सर्वे (ओबिक्स)’ के अनुसार सीजन के लिहाज से व्यवस्थित क्षमता उपभोग में 60 आधार अंकों की बढ़ोतरी हुई और यह 75.5 प्रतिशत हो गया।
लेकिन ईरान युद्ध के बाद बढ़े भू-राजनीतिक तनाव की वजह से कंपनियों और ग्राहकों की लागत बढ़ गई और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा। हालांकि भारत ने काफी हद तक खुद को संभाले रखा। एचडीएफसी म्युचुअल फंड की 11 जून की मार्केट समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के प्रमुख बाजारों में इसके सबूत देखे जा सकते हैं।