कर की अंतिम तिथि चूक सकती हैं कंपनियां

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 5:15 AM IST

कई विदेशी डिजिटल कंपनियां इक्वलाइजेशन लेवी या गूगल कर की पहली किस्त के भुगतान की 7 जुलाई की अंतिम समय सीमा के अनुपालन में चूक कर सकती हैं। इसकी वजह है कि सरकार की तरफ से उन्हें अभी भी कई सारे स्पष्टीकरण का इंतजार है।
आयकर विभाग ने शनिवार को चालान आईटीएनएस 285 नाम से इक्वेलाइजेशन लेवी फॉर्म में बदलाव की अधिसूचना जारी की ताकि एमेजॉन, नेटफ्लिक्स, उबर आदि जैसी विदेशी ई-कॉमर्स परिचालकों से 2 फीसदी लेवी वसूलने की नई व्यवस्था के तहत भुगतान कराया जा सके। शनिवार को अधिसूचना जारी होने से इसके अनुपालन के लिए कंपनियों के पास मुश्किल से दो कार्यदिवस हैं।  
अधिसूचना होने के बावजूद परिचालक कई मुद्दों से जूझ रहे हैं जिनमें भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाली विदेशी मुद्रा का परिवर्तन दर और स्थायी खाता संख्या (पैन) प्राप्त करना शामिल है।  इसके अलावा, इक्वलाइजेशन लेवी की उपयुक्तता के लिए मूल्य के निर्धारण के बारे में स्पष्टता की कमी है विशेष तौर पर उन मामलों में जहां ई-कॉमर्स परिचालाकों द्वारा किए गए लेनदेनों  के मुकाबले आय मामूली है।इक्वलाइजेशन लेवी के दायरे में आने वाली अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों में एडोब, उबर, उडेमी, जूमडॉटअस, एक्सपीडिया, अलीबाबा, आइकिया, लिंक्डइन, स्पोटीफाई और ईबे भी शामिल हैं। कंपनियां और कर सलाहकार सरकार की ओर से फॉर्म दाखिल करने की अंतिम समयसीमा में संभावित तौर पर अंतिम क्षण में राहत दिए जाने या ब्याज और जुर्माना माफ किए जाने को लेकर उम्मीद लगाए बैठी हैं। सरकार की ओर से अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) की बहुप्रतीक्षित सूची अब तक जारी नहीं की गई है।   सरकार ने वित्त विधेयक, 2020 के जरिये सालाना 2 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाले अनिवासी ई-कॉमर्स परिचालकों के व्यापार और सेवाओं पर 2 फीसदी का डिजिटल कर लगाया था। इसमें इक्वेलाइजेश लेवी में विस्तार की गुंजाइश थी जो पिछले वर्ष तक केवल डिजिटल विज्ञापन सेवाओं पर लागू था। नया लेवी 1 अप्रैल से प्रभावी हुआ है।        
इक्वेलाइजेशन लेवी की शुरुआत 2016 में ऑनलाइल विज्ञापन सेवाओं पर 6 फीसदी की दर से इसे लगाकर की गई थी। सरकार ने लेवी से 2018-19 में करीब 1,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।  नांगिया एंडर्सन एलएलपी में पार्टनर संदीप झुनझुनवाला ने कहा, ‘इक्वेलाइजेशन लेवी पर विस्तृत तौर पर एफएक्यू के अभाव में अनिवासी डिजिटल कंपनियां भुगतान के लिए उपयोग में आने वाली विदेशी मुद्रा की परिवर्तन दर, इक्वेलाइजेशन लेवी की उपयुक्तता के लिए मूल्य का निर्धारण आदि जैसे उलझन में पड़ गई हैं।’ कर विभाग ने इसके अनुपालन में पैन के विवरण को अनिवार्य कर दिया है जिससे कंपनियां उलझन में पड़ गई हैं। झुनझुनवाला ने कहा, ‘सरकार के इस कदम ने प्रतिबंधों, लॉकडाउन और महामारी से प्रभावित कारोबारी जीवन के बीच अनिवासी ई-कॉमर्स कंपनियों पर एक कारोबारी दिवस के भीतर पैन के आवदेन करने और उसे प्राप्त करने का दुष्कर और चुनौतीपूर्ण भार डाल दिया है।’

First Published : July 5, 2020 | 11:19 PM IST