facebookmetapixel
Advertisement
पश्चिम एशिया संकट का असर, देश के बड़े शहरों में घरों की बिक्री 6% घटीMaruti Suzuki ने 5 स्टार्टअप्स से मिलाया हाथ, EV बैटरी रीसाइक्लिंग और AI समाधानों पर फोकस 2030 तक 10 GW क्षमता का लक्ष्य, पंप स्टोरेज और हाइब्रिड एनर्जी पर हिंदुजा रिन्यूएबल्स का बड़ा दांव Iveco अधिग्रहण के साथ दुनिया की टॉप-4 CV कंपनियों में शामिल होने का टाटा मोटर्स का लक्ष्यDelhi EV Policy 2.0: पेट्रोल-डीजल वाहनों पर चरणबद्ध रोक; ऑटो कंपनियां चिंतितRBI के सख्त लोन नियमों से ब्रोकरों में खलबली, राहत के लिए वित्त मंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडलApple ने CCI पर लगाया बड़ा आरोप, कहा: जांच में खुद रिसर्च करने के बजाय विरोधियों के दावे किए कॉपी-पेस्टपश्चिम एशिया संकट के बाद खुली सरकार की आंख, अब 40 दिनों की तेल खपत का स्टॉक रखने की तैयारी में भारतविदेश दौरे से लौटते ही एक्शन में प्रधानमंत्री मोदी, मंगलवार को केंद्रीय सचिवों के साथ करेंगे बड़ी बैठकUbharta Purvanchal: UP को $1 ट्रिलियन इकॉनमी बनाने में पूर्वांचल देगा रफ्तार, वाराणसी में जुटेंगे दिग्गज नीति निर्माता

खरीदार बुलाने की चुनौती

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 10:45 AM IST

मंदी का जो हौवा बहुत समय से सबके जेहन में था, वह अब असलियत का जामा पहन चुका है यानी वाकई मंदी आ गई है।


रिटेल क्षेत्र पर इसका असर नहीं पड़ने का सवाल ही नहीं। दरअसल लोगों की खरीदने की क्षमता कम हुई है। इसका असर रिटेलरों पर भी होगा। यह बात अलग है कि महीने के राशन में लोग ज्यादा कटौती नहीं कर सकते, इसलिए उनकी बिक्री तो कमोबेश वैसी ही रहेगी।

लेकिन फैशन से जुड़ी वस्तुओं, परिधान और कंप्यूटर जैसे उपकरणों की बिक्री तेजी से नीचे जाएगी। रिटेल के सामने केवल यही चुनौती नहीं होगी, उनके लिए नकदी का प्रवाह कायम रखना भी आसान बात नहीं होगी।

दरअसल पिछले साल तक विस्तार या दूसरी गतिविधियों के लिए कर्ज लेकर रकम की जुगाड़ करना रिटेलरों के लिए काफी आसान था, लेकिन अब बैंक सख्त हो गए हैं,

इसलिए रकम जुटाना मुश्किल होगा। जाहिर सी बात है कि इसका असर विस्तार और निवेश पर दिखेगा। मेरे खयाल से अगले साल तो रिटेल क्षेत्र में विस्तार तो न के बराबर ही दिखेगा।

एक खास बात यह है कि 2009 में कारोबार में इजाफा बहुत कम होगा। इसकी वजह से कई ऐसे स्टोरों पर हम ताले पड़ते देखेंगे, जो अब तक घिसट-घिसटकर चल रहे हैं। ग्राहक खर्च के बजाय संकट के दौर में बचत पर जोर दे रहे हैं, इसलिए रिटेल स्टोरों की कमाई कम होना लाजिमी है।

वैसे, रिटेलरों के लिए गांवों से उम्मीद की किरण दिख रही है। खेती में मंदी नहीं है और गांवो में मांग भी कम नहीं हुई है। इसलिए कस्बों या छोटे शहरों तक पहुंच वाले रिटेलरों को राहत मिल सकती है।

जहां तक छंटनी का सवाल है, तो लागत का दबाव तो सभी पर है और रिटेल क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन बिना कर्मचारियों के बिक्री तो संभव नहीं है,

इसलिए छंटनी का बड़ा दौर यहां देखने को नहीं मिलेगा, लेकिन स्टोर ही बंद हुए, तो लोग बेरोजगार जरूर होंगे। हां, नई नियुक्तियां होना मुश्किल है और वेतन में इजाफे के बारे में नहीं सोचने में ही समझदारी है।

 (बातचीत : ऋषभ कृष्ण)

लोग अब बचत पर जोर दे रहे हैं।?इसलिए बिक्री करना होगा टेढ़ी खीर 

अंबीक खेमका
समूह अध्यक्ष, विशाल रिटेल

विस्तार योजनाओं पर लग गया ग्रहण।आगे की राह पथरीली

मोहित खट्टर

अध्यक्ष, सुभिक्षा ट्रेडिंग सर्विसेज

Advertisement
First Published - December 22, 2008 | 11:21 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement