बीएस बातचीत
बजट 2022 को अच्छा बताते हुए जेफरीज में इक्विटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख क्रिस्टोफर वुड ने पुनीत वाधवा के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि बजट के नए प्रस्ताव वित्त मंत्री द्वारा पिछले साल (2021) के बजट के अनुरूप हैं। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
बजट प्रस्तावों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
सरकार ने पूंजीगत खर्च पर ईमानदारी के साथ ध्यान केंद्रित किया है और मैं वित्तीय घाटे पर प्रभाव को लेकर वाकई चिंतित नहीं हूं। बेहद महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि भारतीय सरकार बुनियादी ढांचा निर्माण पर ज्यादा पूंजी खर्च कर रही है, भुगतान स्थानांतरण पर नहीं। यह रुझान पिछले साल भी बना रहा, जब सरकार ने सतर्कता के साथ पूंजी खर्च करने का निर्णय लिया। मेरा मानना है कि यह बजट राजस्व को लेकर ज्यादा सतर्कता वाला है। मेरे हिसाब से, बजट के प्रस्ताव वित्त मंत्री द्वारा पिछले साल के बजट में की गईं घोषणाओं की निरंतरता थीं। भारत सरकार ने अब जीडीपी वृद्घि दर वित्त वर्ष 2023 के लिए 8-8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो ऊंचे आधार प्रभाव के बावजूद एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है।
क्या आप मानते हैं कि प्रस्ताव ऐसे समय में मुद्रास्फीतिकारी हो सकते हैं जब तेल कीमतें पहले ही चढ़ चुकी हैं?
मैं इसे लेकर भी चिंतित नहीं हूं। बढ़ती तेल कीमतों का प्रभाव वैश्विक बाजारों पर भी पड़ेगा और मेरा मानना है कि तेल कीमतों में और तेजी आएगी। यह मुख्य तौर पर अमेरिका, जी-7 मुद्दा है और विशेषकर एशियाई या भारतीय मुद्दा नहीं है। जहां भारत ने अतीत में ऊंची मुद्रास्फीति का सामना किया है, वहीं अमेरिका और यूरोजोन ने बेहद गंभीर मुद्रास्फीति-संबंधित समस्याओं से मुकाबला किया और आगे भी उसकी स्थिति इस संबंध में मजबूत बनी रहेगी।
इस संदर्भ में आप भारतीय इक्विटी बाजारों को किस नजरिये से देखते हैं?
भारतीय बाजार पिछली कुछ तिमाहियों से महंगे दिख रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद उनमें अच्छी संभावनाएं हैं। इस सबसे संकेत मिलता है कि उन्हें आय वृद्घि की संभावना है। मुझे उम्मीद है कि हम भारतीय अर्थव्यवस्था में उसी स्थिति में हैं, जब हम 2002-03 में थे। तब रियल एस्टेट/आवासीय चक्र भारत में शुरू हुआ था। मैं भारत में ढांचागत तौर पर उत्साहित बना हुआ हूं।
क्या भारतीय इक्विटी को घरेलू समस्याओं या बाहरी कारकों से जोखिम है?
दो बड़े बाहरी जोखिम भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट ला सकते हैं, जिनमें अमेरिकी फेड का नीतिगत रुख और बढ़ती तेल कीमतें शामिल हैं। निवेशकों को अपने इक्विटी आवंटन को बढ़ाने के लिए गिरावट का इस्तेमाल करना चाहिए। तेल संबंधित जोखिम से बचने का अच्छा तरीका अपना स्वयं का तेल स्टॉक करना।
छोटे निवेशकों को आपकी क्या सलाह है?
मेरी सलाह मार्जिन पर इक्विटी रखने की नहीं, नियमित तौर पर हर महीने निवेश करने और बड़ी गिरावट पर खरीदारी का इस्तेमाल करने की है। मैं हर महीने खरीदारी की सलाह दे रहा हूं, क्योंकि मेरा मानना है कि अमेरिकी फेडरल की नीतिगत सख्ती के चक्र से अस्थिरता बढ़ेगी और गिरावट पर खरीदारी का अवसर मिलेगा।
क्या भारत में इन्फ्रा/पूंजीगत खर्च संबंधित दांव पर ध्यान देने के लिए यह सही समय है?
यदि हम व्यापक पूंजीगत खर्च चक्र देखते हैं तो इससे संबंधित शेयरों से लाभ मिलेगा। इस सबसे भविष्य में कॉरपोरेट आय में सुधार लाने में मदद मिलेगी। इसलिए उस संदर्भ में, यदि हम वर्ष 2002-03 की धारणा पर अमल करें तो व्यापक पूंजीगत खर्च चक्र से पहले प्रॉपर्टी चक्र में तेजी पर अमल किया गया था। मैं उम्मीद कर रहा हूं कि इस बार भी ऐसा होगा।
क्या आप अमेरिकी फेड द्वारा दर वृद्घि की संभावना देख रहे हैं?
हां, निश्चित तौर से। वह मार्च 2022 में ब्याज दरें बढ़ाएगा।