वेदांत को न्यायालय से बड़ी राहत

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 1:52 AM IST

रावा तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़े एक मामले में उच्चतम न्यायालय से अनिल अग्रवाल के वेदांत समूह को बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने आज सरकार की उस अर्जी को ठुकरा दिया, जिसमें एक न्यायाधिकरण के निर्णय को चुनौती दी गई थी। न्याधिकरण ने वेदांत को रावा तेल एवं गैस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार द्वारा तय रकम 19.8 डॉलर के बजाय 49.9 करोड़ डॉलर रकम  वसूलने की इजाजत दी थी। सरकार इस मद में वेदांत को केवल 19.8 करोड़ डॉलर ही देने को तैयार थी।
यह पूरा मामला उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी)की व्याख्या, खासकर रावा क्षेत्र के विकास पर ठेकेदारों को आए खर्च से जुड़ा है। सरकार और केयर्न ऑयल ऐंड गैस (वेदांत की एक इकाई) ने 1993 में उत्पादन साझा करने संबंधी एक समझौता किया था। रावा में तेल एवं गैस की खोज ऑयल ऐंड नैचुरल गैस
कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) ने की थी। समझौते के अनुसार यह तय हुआ था कि इस क्षेत्र का विकास 5 प्रतिशत शुल्क के साथ 18.98 करोड़ डॉलर की लागत से किया जाएगा। इसे बेस डेवलपमेंट कॉस्ट (बीडीसी) के नाम से भी जाना जाता है। यह विवाद 2000 से 2007 के बीच आई लागत की वसूली से जुड़ा है।
सरकार का दावा था कि केयर्न ऑयल ऐंड गैस मनमाने ढंग से 49.9 डॉलर रकम की मांग कर रही है, जो तय रकम से कहीं अधिक है। बाद में यह मामला मलेशिया के एक न्यायाधिकरण में चला गया, जिसने केयर्न के पक्ष में निर्णय सुनाया। 2018 में यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष उठा, जिसके बाद न्यायालय ने न्यायाधिकरण के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वेदांत के समूह मुख्य कार्याधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा,’हम न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं। इस आदेश से वैश्विक कारोबारी समुदाय में सकारात्मक संदेश जाएगा।’

First Published : September 16, 2020 | 11:32 PM IST