ऐपल इंक ने आईफोन के ‘फ्रेट ऑन बोर्ड’ (एफओबी) उत्पादन मूल्य के लक्ष्य से 80 प्रतिशत से भी अधिक कीमत के फोन बना डाले हैं। यह लक्ष्य उसने पांच वर्षीय उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की समाप्ति पर हासिल किया। सरकार बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए यह योजना लाई थी। यह जानकारी उन आंकड़ों पर आधारित है जो कंपनी की ओर से आईफोन असेंबल करने वाले प्रमुख वेंडरों ने सरकार को दिए हैं।
वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2026 तक की पीएलआई अवधि कुछ ही दिनों में समाप्त हो रही है। इस दौरान ऐपल इंक ने अपने प्रमुख वेंडरों के माध्यम से 6,02,324 करोड़ रुपये मूल्य के आईफोन असेंबल किए हैं। यह जानकारी फरवरी तक सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों और मार्च के लिए अनुमानित औसत पर आधारित है। हालांकि, इस पांच साल की अवधि के लिए उसका कुल लक्ष्य केवल लगभग 3,35,331 करोड़ रुपये था। इसका उसने सरकारा से वादा किया था ताकि योजना में वह इंसेंटिव की पात्र हो)
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वित्त वर्ष 2026 में आईफोन उत्पादन बढ़कर 5.5 करोड़ यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है। मुख्य रूप से भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में भारी बढ़ोतरी के कारण इसमें तेजी आई है और इस वित्त वर्ष में यह देखने को मिली है। तेजी का कारण उत्पादन क्षमता चीन से यहां स्थानांतरित होना रहा है।
सरकार के शुरुआती अनुमानों के आधार पर वित्त वर्ष 2026 में उत्पादन की वैल्यू 2,27,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के 1,83,000 करोड़ रुपये की तुलना 24 प्रतिशत से भी ज्यादा है।
उत्पादन मूल्य में हुई भारी बढ़ोतरी ने ऐपल इंक को भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में मदद की है। उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 तक भारत में आईफोन का उत्पादन कंपनी के कुल वैश्विक उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। सरकार का अनुमान है कि कुछ ही वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
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क्युपर्टिनो की इस कंपनी ने पहले वर्ष में उत्पादन की शुरुआत धीमी गति से की थी और उस दौरान उसने केवल 18,900 करोड़ रुपये के मूल्य का आईफोन उत्पादन किया था। लेकिन इस योजना के अंतिम दो वर्षों में कंपनी के उत्पादन को जबरदस्त रफ्तार मिली। पांच वर्षों की इस अवधि के दौरान हुए कुल उत्पादन मूल्य में इन दो वर्षों का योगदान 67 प्रतिशत रहा।