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एमेजॉन इंडिया (Amazon India) ने 1,000 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर सेलर्स से लिया जाने वाला रेफरल फीस (कमीशन) 31 दिसंबर तक खत्म कर दिया है। यह जानकारी इकॉनॉमिक टाइम्स ने दी। आम तौर पर, रिफरल फीस उत्पाद की श्रेणी के हिसाब से 2 प्रतिशत से 16.5 प्रतिशत तक होती है।
पहले यह छूट सिर्फ 30 नवंबर तक थी, लेकिन अब इसे बढ़ा दिया गया है। हालांकि, सभी प्रोडक्ट्स इस छूट में शामिल नहीं हैं। यह कदम वॉलमार्ट की सहायक कंपनी फ्लिपकार्ट की रणनीति से मिलता-जुलता है।
फ्लिपकार्ट का शून्य कमीशन मॉडल
कुछ हफ्ते पहले फ्लिपकार्ट ने 1,000 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स के लिए शून्य कमीशन नीति लागू की थी। इसके अलावा, फ्लिपकार्ट के हाइपरवैल्यू प्लेटफॉर्म, शॉपसी, पर अब सेलर्स किसी भी कीमत का प्रोडक्ट बिना कमीशन दिए लिस्ट कर सकते हैं। इसका मकसद मेसो जैसी वैल्यू-कॉमर्स कंपनियों से मुकाबला करना है, जो मुख्य रूप से विज्ञापन और लॉजिस्टिक शुल्क से कमाई करती हैं।
फ्लिपकार्ट ने सेलर्स के लिए रिटर्न फीस भी 35 रुपये कम कर दी है, जिससे कारोबार की लागत लगभग 30 प्रतिशत तक घट सकती है।
सेलर्स और कस्टमर्स पर असर
अगर सेलर्स यह बचत ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो प्रोडक्ट्स की कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिससे विंटर सेल के दौरान ऑनलाइन मांग बढ़ेगी। फ्लिपकार्ट का कहना है कि यह कदम छोटे शहरों और अर्ध-शहरी निर्माण केंद्रों जैसे शांतिपुर, मोरबी और खुरजा के सेलर्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ने में मदद करेगा।
Amazon ने अप्रैल 2025 में 300 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर रिफरल फीस घटाई थी, ताकि छोटे कारोबारियों को समर्थन मिल सके। वहीं, फ्लिपकार्ट की शून्य कमीशन नीति और लागत में कटौती का मकसद मध्यम वर्ग के शॉपर्स को आकर्षित करना और प्लेटफॉर्म पर विकल्प बढ़ाना है।
BofA Securities के अनुसार, मेसो मुख्य रूप से मास-मार्केट यूजर्स को सेवा देती है, अमेज़न प्रीमियम सेगमेंट पर ध्यान देती है और फ्लिपकार्ट शहरी और टियर-1 और टियर-2 शहरों के ग्राहकों पर केंद्रित है।