अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने आज कहा कि समूह अगले दशक में 100 अरब डॉलर (8.1 लाख करोड़ रुपये) का और निवेश करेगा, जिसमें से अच्छी-खासी राशि ऊर्जा में होगी। उन्होंने महत्त्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा करते हुए यह जानकारी दी, जिनके संबंध में उन्होंने दावा किया कि इससे भारत शुद्ध ऊर्जा निर्यातक बन सकता है। समूह ने अपने नए निवेश का 70 प्रतिशत हिस्सा ऊर्जा परिवर्तन क्षेत्र और बुनियादी ढांचे के लिए निर्धारित किया है।
अदाणी ने सिंगापुर में फोर्ब्स ग्लोबल सीईओ सम्मेलन में कहा कि हम पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े सोलर भागीदार हैं और हमारा इरादा और अधिक करने का है। इस संदर्भ में अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज ऊर्जा संक्रमण के क्षेत्र में हमारे द्वारा लगाए जा रहे दांव को दर्शाती है। एकीकृत हाइड्रोजन आधारित मूल्य श्रृंखला में 70 अरब डॉलर का निवेश करने की हमारी प्रतिबद्धता है।
उन्होंने कहा ‘हमारे मौजूदा 20 गीगावाट नवीकरणीय पोर्टफोलियो के अलावा, नए व्यवसाय को 45 गीगावाट हाइब्रिड नवीकरणीय बिजली उत्पादन द्वारा बढ़ाया जाएगा। यह उद्यम 1,00,000 हेक्टेयर भूमि में फैला हुआ है, जो सिंगापुर का 1.4 गुना क्षेत्र है। इससे 30 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का व्यवसायीकरण होगा।’
समूह आने वाले दिनों में 45 गीगावाट हाइब्रिड अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता जोड़ेगा करेगा। इसके अलावा सौर पैनल, पवन टर्बाइन और हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर बनाने के लिए तीन कारखानों को स्थापित किया जाएगा। अदाणी ने कहा कि आज हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि हमारे पास हरित इलेक्ट्रॉन के पहले सबसे कम खर्चीले उत्पादकों में से एक बनने और उसके बाद हरित हाइड्रोजन के सबसे कम खर्चीले उत्पादक बनने का दृष्टिकोण है।
अलग-थलग महसूस करेगा चीन
अदाणी का मानना है कि बढ़ते राष्ट्रवाद और आपूर्ति श्रृंखला और प्रौद्योगिकी से संबंधित अंकुशों के कारण चीन खुद को अलग-थलग महसूस करने लगेगा। उन्होंने कहा कि चीन में प्रौद्योगिकी संबंधी प्रतिबंधों से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को खतरा है। उन्होंने कहा कि चीन की ‘बेल्ट ऐंड रोड’ परियोजना का कई देशों में विरोध हो रहा है।
उन्होंने कहा ‘मेरा अनुमान है कि वैश्वीकरण के ‘चैंपियन’ के रूप में देखा जाने वाला चीन तेजी से अपने आपको अलग-थलग महसूस करेगा। बढ़ते राष्ट्रवाद, आपूर्ति श्रृंखला जोखिम और प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों का प्रभाव पड़ेगा।’ अदाणी ने कहा ‘मुझे उम्मीद है कि ये सभी अर्थव्यवस्थाएं समय के साथ फिर से पटरी पर आ जाएंगी और मजबूती से वापसी करेंगी। लेकिन इस बार अर्थव्यवस्था में वापसी अधिक कठिन लग रही है।’