facebookmetapixel
Advertisement
बॉन्ड यील्ड में गिरावट से बैंकों को होगा फायदा, Q1 में ट्रेजरी मुनाफा बढ़ने की उम्मीदFiscal Deficit: अप्रैल-मई में सरकार का राजकोषीय घाटा 12 गुना बढ़ा, RBI डिविडेंड के बावजूद बढ़ा दबावRBI FSR: मार्च में बैंकों का एनपीए घटकर 0.4% पर, कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा फंसे कर्ज का दबावअर्थव्यवस्था मजबूत, पर मॉनसून और पश्चिम एशिया संकट से अब भी जोखिमडिबेंचर धारकों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित, नियमों की होगी समीक्षाSEBI AIF Rules: निवेशकों के अधिकार बढ़ाने की तैयारी, संबंधित पक्षों के सौदों पर 75% मंजूरी का प्रस्तावCrude Oil Outlook: दूसरी छमाही में कच्चा तेल औसतन 72 डॉलर रहने के आसार: बोफाकोविड के बाद सेंसेक्स की सबसे खराब पहली छमाही, मिड-स्मॉलकैप बने निवेशकों का सहारादुबई रियल एस्टेट में सुस्ती के बीच FY27 में डैन्यूब की नजर 4 अरब डॉलर की परियोजनाओं परARAI ने बदला फैसला, ऑटो पीएलआई स्कीम में अब पूरे साल लागू होगी एक ही विनिमय दर

आवक काफी बढ़ी, फिर भी कम नहीं हुए सब्जियों के दाम

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 5:02 AM IST

इस बार पिछले साल की तुलना में सब्जियों की आपूर्ति में 35 से 60 फीसदी का इजाफा हुआ है।


इसके बावजूद, सब्जियों की कीमतें आसमान को छू रही हैं। राजधानी की मशहूर सब्जी मंडी आजादपुर को ही लें तो इस बार यहां कई सब्जियों की आवक 100 से 150 फीसदी तक बढ़ी है।

लेकिन उसी तरह इनकी कीमतें भी 50 से 100 फीसदी बढ़ गई हैं। कृषि उत्पाद और विपणन समिति (एपीएमसी) के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर मे टमाटर की आवक 4056 टन और हरी मिर्च की 1175 टन थी। मटर, बैंगन और गाजर की आवक क्रमश: 730, 639  और 76 टन थी, जबकि इस अक्टूबर में टमाटर और हरी मिर्च की आवक बढ़कर 8585 टन और 1754 टन हो गई।

मटर, बैंगन और गाजर की आवक क्रमश: 775, 2107 और 1491 टन पर पहुंच गई। आवक में इस जोरदार बढ़ोतरी के बावजूद कीमतों में कोई कमी नहीं हुई। उल्टा इसमें जोरदार उछाल आ गया। कीमतों की बात करें तो पिछले अक्टूबर में टमाटर, हरी मिर्च, मटर, बैंगन और गाजर क्रमश: 852, 223, 2933, 614 और 903 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहे थे।

 इस अक्टूबर में इनकी कीमतें बढ़कर क्रमश: 1673, 242, 4,275, 962 और 1,218 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। इस तरह पिछले साल की तुलना में सब्जियों की कीमतों में 35 से 70 फीसदी का उछाल हो चुका है।

आजादपुर सब्जी मंडी ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जयराम बंसल का कहना है कि मजदूरी, किराया और अन्य लागतों के बढ़ने से सब्जियों की कीमतें बढ़ी हैं। एपीएमसी के किसान सहायता विभाग के रवि तिवारी कहते हैं कि इस बार सब्जियों की मांग भी पिछले साल से ज्यादा रही है।

यही नहीं, लागत बढ़ने के बावजूद आढ़तियों द्वारा अपना मार्जिन कम न करने से सब्जियों की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी हुई है। टमाटर थोक विक्रेता विजय सिंह मानते है कि बिहार में अगर बाढ़ न आती तो मंडी में सब्जियों की आवक और ज्यादा होती।

लेकिन बाढ़ की वजह से कई सब्जियों की आवक न हो पाने के कारण कीमतें और ज्यादा उछल गई। समय से पहले आए मानसून ने भी कई फसलों को बरबाद कर दिया। प्याज और टमाटर की काफी फसल तो इसी कारण सड़ गई। इसके कारण सब्जियों की आवक अच्छी होने के बावजूद कीमतों में सीधे तौर पर उछाल आया।

Advertisement
First Published - November 24, 2008 | 11:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement