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फिर कसैला होगा गन्ना?

Last Updated- December 08, 2022 | 1:45 AM IST

उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार की ओर से तय गन्ने की कीमत पर एक बार फिर विवाद खड़ा होता नजर आ रहा है।


राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) के विरूद्ध उत्तर प्रदेश शुगरकेन फेडरेशन ने उच्चतम न्यायालय के साथ-साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच में कैविएट याचिका दायर की है। उल्लेखनीय है राज्य सरकार की ओर से 18 अक्टूबर को गन्ने के समर्थन मूल्य में रिकॉर्ड 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2008-09 पेराई सत्र के लिए निम् गुणवत्ता वाले गन्ने की कीमत 137.50 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि सामान्य किस्म की 140 रुपये प्रति क्विंटल और अगौती किस्म के लिए 145 रुपये प्रति क्विंटल कीमत तय की है।

पिछले वर्ष सामान्य किस्म के गन्ने की कीमत 125 रुपये प्रति क्विंटल थी। गन्ने की कीमत में अब तक सबसे ज्यादा बढ़ोतरी करीब 12 रुपये प्रति क्विंटल वर्ष 2004-05 में की गई थी।
उधर, चीनी मिलों की ओर से भी राज्य समर्थित मूल्य का विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि मिलें 112 रुपये प्रति क्विंटल कीमत देने को तैयार हैं।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के सचिव सी.बी. पटौदिया ने बताया कि घरेलू चीनी उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है और मिलें गन्ने की इतनी ज्यादा कीमत देने में सक्षम नहीं हैं। चीनी उद्योग गन्ने की ऊंची कीमत देने का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन सरकार को इसके लिए 15 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी देनी चाहिए।

First Published - October 27, 2008 | 10:56 PM IST

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