चीनी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन इसका फायदा अभी आम ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है। सोमवार को चीनी मिलों से बिकने वाली चीनी का भाव घटकर करीब 47 रुपये प्रति किलो रह गया। 18 अगस्त को यह 67 रुपये प्रति किलो के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। यानी दो हफ्ते से भी कम समय में मिल स्तर पर चीनी करीब 30 फीसदी सस्ती हो चुकी है।
इसके बावजूद दुकानों पर चीनी अभी भी महंगी मिल रही है। रविवार को खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव 64.23 रुपये प्रति किलो था, जबकि थोक भाव 59.72 रुपये प्रति किलो था।
इसकी सबसे बड़ी वजह पुराना स्टॉक है। दुकानदारों ने पहले चीनी ज्यादा कीमत पर खरीदी थी। ऐसे में वे पुराने माल को कम दाम पर बेचकर नुकसान नहीं उठाना चाहते। आमतौर पर एक दुकानदार के पास 50 किलो वाली चीनी की 10 से 15 बोरियां होती हैं। जब तक यह पुराना स्टॉक खत्म नहीं होता और कम कीमत वाला नया माल दुकान तक नहीं पहुंचता, खुदरा कीमतों में बड़ी गिरावट दिखाई नहीं देगी।
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, मिल स्तर पर कीमत घटने का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं।
सरकार के कई कदमों के बाद मिल स्तर पर चीनी के भाव नीचे आए हैं। सरकार ने उन मिलों को देश में चीनी बेचने की अनुमति दी है, जिन्होंने पहले निर्यात के लिए चीनी तैयार की थी। इससे अगले दो महीनों में करीब 3 से 3.5 लाख टन अतिरिक्त चीनी घरेलू बाजार में आने की उम्मीद है। बाजार में ज्यादा चीनी आने से कीमतों पर दबाव पड़ा है।
सरकार ने बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए भंडारण के नियम भी सख्त किए हैं। 1 सितंबर से हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले कारोबारी एक बार में 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इसके बाद मिलों की ओर से बड़े ग्राहकों को सीधे या डीलरों के जरिए बेची गई चीनी की मात्रा की भी जांच की जाएगी। नए नियमों के चलते कई बड़े खरीदारों ने पहले से रखा अतिरिक्त स्टॉक कम करना शुरू कर दिया है।
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, मिल और थोक कीमत के बीच आमतौर पर 2 से 3 रुपये प्रति किलो का अंतर रहता है। वहीं मिल और खुदरा कीमत के बीच यह अंतर 7 से 8 रुपये प्रति किलो तक रहता है। इस लिहाज से अगर मिल स्तर पर चीनी के भाव 47 रुपये प्रति किलो के आसपास बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी कीमतें नीचे आ सकती हैं। हालांकि इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा।
सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है। हालांकि 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। वहीं देश में सालाना चीनी की मांग करीब 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है।