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कंपनियों की डॉलर मांग से रुपया ​फिर 90 के पार, आरबीआई की पकड़ ढीली

स्थानीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 90.21 पर टिकी, जबकि ए​क दिन पहले यह 89.97 पर बंद हुई थी

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- January 02, 2026 | 10:08 PM IST

डॉलर के मुकाबले रुपये में शुक्रवार को गिरावट आई और यह 90 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था। इसकी वजह कंपनियों की निरंतर डॉलर मांग रही। अमेरिका में छुट्टी होने के कारण कारोबार का वॉल्यूम कम रहा, जिससे दिन के दौरान उतार-चढ़ाव और कम करने में मदद मिली। डीलरों ने यह जानकारी दी। स्थानीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 90.21 पर टिकी, जबकि ए​क दिन पहले यह 89.97 पर बंद हुई थी।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, रुपये ने 90 प्रति डॉलर के स्तर को तोड़ दिया। इस स्तर पर अधिकतम स्टॉप लॉस थे। आरबीआई ने इस स्तर को छोड़ दिया और रुपये को 90.23 प्रति डॉलर की ओर जाने दिया। आरबीआई 19 दिसंबर से इस स्तर की रक्षा कर रहा था, लेकिन अंततः उसे यह स्तर छोड़ना पड़ा क्योंकि ऋण और इक्विटी में एफपीआई की निकासी जारी रही। आयातकों ने निचले स्तरों पर 89.30 प्रति डॉलर तक हेजिंग की, लेकिन आरबीआई की शॉर्ट पोजीशन ने रुपये में किसी भी तेजी को लेकर बाजार को सतर्क रखा है। आरबीआई को संबंधित तिथि पर डॉलर खरीदने होंगे क्योंकि नवंबर में शॉर्ट पोजीशन बढ़कर 66 अरब डॉलर पर पहुंच गई हैं।

आरबीआई के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार रुपये के फॉरवर्ड मार्केट में केंद्रीय बैंक की बकाया नेट शॉर्ट डॉलर पोजीशन नवंबर के अंत तक बढ़कर 66.04 अरब डॉलर हो गई जबकि अक्टूबर के अंत तक यह 63.6 अरब डॉलर थी।

2025 में स्थानीय मुद्रा में 4.74 फीसदी की गिरावट आई है और यह एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बनकर उभरी है। यह कमजोरी अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता, अमेरिका व जापान जैसे विकसित बाजारों में लगातार ऊंची ब्याज दरें (कैरी ट्रेड पूंजी के प्रमुख स्रोत) और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निवेश निकासी के कारण आई क्योंकि वैश्विक पूंजी ज्यादा प्रतिफल वाले बाजारों की ओर जा रही थी।
दूसरी ओर, सरकारी खर्च के चलते दो सप्ताह बाद बुधवार को बैंकिंग प्रणाली में शुद्ध तरलता अधिशेष में पहुंच गई। बुधवार और गुरुवार को शुद्ध तरलता का अधिशेष क्रमशः 17,335 करोड़ रुपये और 23,865 करोड़ रुपये रहा।

हालांकि 20 जनवरी के आसपास जीएसटी से करीब 1 लाख करोड़ रुपये की निकासी निकट भविष्य में मुख्य समस्या होगी, लेकिन अग्रिम कर भुगतान न होने और भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जनवरी में निर्धारित 1.5 लाख करोड़ रुपये की ओएमओ खरीद और 10 अरब डॉलर के बाय-सेल स्वैप के कारण सिस्टम में तरलता अधिशेष में रहने की उम्मीद है। लेकिन तरलता को सकारात्मक बनाए रखने के लिए (जो एनडीटीएल की करीब 1 फीसदी है) आरबीआई को फरवरी और मार्च के बीच करीब 1 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त ओएमओ की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप से संबंधित निकासी जारी रहेगी। मार्च तिमाही में मुद्रा की मांग आमतौर पर बढ़ भी जाती है।

इस बीच, 26 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.2 अरब डॉलर बढ़कर 696.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया। कुल भंडार में वृद्धि मुख्य रूप से स्वर्ण भंडार में हुई, जो इस सप्ताह के दौरान 2.95 अरब डॉलर बढ़ गया। इसी अवधि में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 18.4 करोड़ डॉलर की वृद्धि हुई। सितंबर 2024 में भंडार रिकॉर्ड 705 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

First Published : January 2, 2026 | 9:55 PM IST