अथॉरिटी आफ एडवांस रूलिंग (एएआर), कर्नाटक ने कहा है कि अंडे कृषि उत्पाद हैं और इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नहीं लगेगा, हालांकि कर अधिकारी इस पर कर लगाए जाने को लेकर तर्क दे रहे हैं।
यह नियम एसएएस कार्गो की ओर से दाखिल एक आवेदन पर आया है, जो रेल से अंडों और हेचरीज की ढुलाई के कारोबार से जुड़ी है। इस मसले पर एएआर ने बेंगलूरु साउथ जीएसटी कमिश्नरी के सेंट्रल टैक्स कमिश्नर के माध्यम से सरकार की राय मांगी।
सहायक आयुक्त ने जवाब दिया है कि जीएसटी कानून के मुताबिक कृषि उत्पाद पौधों की खेती और घोड़ों को छोड़कर सभी तरह के पशुपालन से प्राप्त उत्पाद हैं, जिनका या तो कोई प्रसंस्करण नहीं किया जाता है और न ही उसके मूल चरित्र में बदलाव किया जाता है। हालांकि उन्होंने कहा कि अंडों का उत्पादन वाणिज्यिक उद्यम लगता है, न कि कृषि गतिविधि है। कर कार्यालय का विचार है कि जीएसटी कानून और इसके तहत दिए गए स्पष्टीकरण किसानों को राहत देने के लिए हैं, जिनका काम कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़ा है, जैसे पशुपालन, मछली पालन, रेशम उत्पादन आदि। कर कार्यालय का विचार है कि अंडे कृषि उत्पाद की संभावनाओं से अलग हैं, जैसा कि जीएसटी कानून और उसकी व्याख्याओं में कहा गया है।
बहरहाल एएआर ने नियम बनाया है कि अंडे, जिनका आगे प्रसंस्करण नहीं किया गया है, वे कृषि उत्पाद की परिभाषा में आते हैं, जैसा कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने परिभाषित किया है। इसने यह भी कहा है कि अंडों की ढुलाई की सेवा पर जीएसटी से छूट होगी।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केपीएमजी इंडिया में अप्रत्यक्ष कर के पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा कि यह समझना जरूरी है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि कृषि उत्पाद के रूप में वर्गीकृत है या नहीं।उन्होंने कहा, ‘जहां कोई कृत्रिम प्रक्रिया नहीं की जाती है और उत्पाद को यथावत इस्तेमाल व आपूर्ति की जी सती है, जिसकी आगे किसी प्रसंस्करण की जररूरत नहीं होती है, वे कृषि उत्पाद की श्रेणी में आते हैं।’