केंद्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार ने आज कहा कि देश को मांग-आपूर्ति का समीकरण बिगडऩे जैसे हालात से निपटने के लिए कोयला, गैस और तेल के रणनीतिक ईंधन भंडार रखने के बारे में विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें कोयला, गैस, तेल जैसे ईंधनों के करीब एक महीने के रणनीतिक भंडार रखने के बारे में विचार शुरू करना चाहिए ताकि अर्थव्यवस्थाएं आपूर्ति में कमी की स्थिति से निपट सकें। इसकी लागत इन देशों के सामने मौजूद अवरोध और अनिश्चितता की कीमत की तुलना में बहुत कम होगी।’
सचिव का बयान ऐसे समय आया है, जब देश बड़ी मुश्किल से कोयले की कमी के संकट से बचा हुआ है। संकट अगस्त में शुरू हुआ था। अगस्त से ताप बिजली इकाइयों के पास कोयले का भंडार कम हुआ है। राष्ट्रीय बिजली पोर्टल के मुताबिक इस समय 29 गीगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता की इकाइयों के पास महज एक दिन का कोयला भंडार है, जबकि 22 गीगावाट क्षमता की इकाइयों में तीन दिन से भी कम का कोयला भंडार है।
हालांकि केंद्रीय ऊर्जा और कोयला मंत्रालय ने शुरुआत में कोयले की किल्लत और बिजली आपूर्ति के संकट की खबरों से इनकार किया था। लेकिन बाद में केंद्र ने घरेलू कोयला आपूर्ति में कमी का हवाला देते हुए ताप बिजली उत्पादकों से कम से कम 10 फीसदी मिश्रण के लिए कोयला आयात करने को कहा।
कुमार ने सीआईआई दक्षिण एशिया बिजली सम्मेलन में कहा कि देश आयातित कोयले के दम पर खुद को आपूर्ति के इन झटकों से कभी महफूज नहीं बना सकता। उन्होंने कहा, ‘हमारे यहां 17,000 मेगावाट क्षमता आयातित कोयले पर निर्भर है। अगर आयातित कोयले के दाम बढ़ती हैं तो यह क्षमता बंद हो जाती है। भारत में 24,000 मेगावाट के बिजली संयंत्र गैस से चलते हैं। उनमें उत्पादन करीब-करीब ठप है। ऐेसे में अगर हम सोच-समझकर कोई रणनीति नहीं बनाएंगे तो ऊंची कीमतें ऊर्जा सुरक्षा को चुनौतीपूर्ण बना देंगी।’
सचिव ने पहले इस अखबार को बताया था कि केंद्र मांग-आपूर्ति का गणित बिगडऩे की स्थितियों से बचने के लिए ताप बिजली संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति और भंडारण के नियम दोबारा बनाएगा। कोयला और बिजली मंत्रालयों ने मिलकर ताप बिजली इकाइयों के लिए मासिक कोयला आपूर्ति कार्यक्रम तैयार करने का फैसला किया है ताकि मार्च के अंत तक बिजली इकाइयों में कुल मिलाकर कम से कम चार करोड़ टन का भंडार रहे।
केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने कोयले की अधिक मांग पूरी करने के लिए अधिशेष बिजली आपूर्ति वाली उत्पादक इकाइयों को कारोबारी बाजार में बेचने की भी मंजूरी दे दी है। इनमें टाटा और अदाणी मुंद्रा जैसे आयातित कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र शामिल हैं।
केंद्र ने कहा कि पिछले सप्ताह से आपूर्ति की स्थिति सुधर रही है क्योंकि कोल इंडिया लिमिटेड से आपूर्ति सुधरी है और देश के कई हिस्सों में बारिश होने एवं तापमान गिरने से मांग कम हुई है।
क्रिसिल ने हाल की अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘कोयले का भंडार 15 से 18 दिन के भंडार के पिछले स्तर से जल्द सुधरने के आसार नहीं हैं।’ इसने कहा कि मांग-आपूर्ति की स्थिति के लिए रेक की उपलब्धता और मार्च से मई तक की अवधि में बिजली की मांग को देखना होगा। कुमार ने कहा कि ईंधन लघु अवधि का लक्ष्य है और असली राहत नवीकरणीय ऊर्जा के प्रसार से मिलेगी। उन्होंने कहा कि बिजली मंत्रालय जल्द ही बदलाव लाने वाले अहम आदेश जारी करेगा, जिनसे नवीकरणीय ऊर्जा के लिए बिजली पारेषण योजना पूर्णतया बदल जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में ऊर्जा भंडारण की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा, ‘एनटीपीसी ने 1,000 मेगावाट बैटरी स्टोरेज के लिए अभिरुचि पत्र आमंत्रित किए हैं। हम लद्दाख में 10 गीगावाट की पारेषण प्रणाली के लिए 12 गीगावाट की बैटरी भंडारण क्षमता की योजना बना रहे हैं। हम गुजरात से पारेषण के लिए 13 गीगावाट बैटरी भंडारण रखेंगे।’