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चीनी की मांग पर संकट के बादल: खपत 4 लाख टन घटने का अनुमान, युद्ध व मौसम ने बिगाड़ा गणित

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पश्चिम एशिया संकट और बदलते मौसम के कारण भारत में चीनी की खपत घटने का अनुमान है। सरकार एथनॉल के उपयोग और न्यूनतम बिक्री मूल्य पर विचार कर रही है

Last Updated- April 07, 2026 | 10:36 PM IST
Sugar
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया संकट के कारण रसोई गैस की कमी होने और मार्च में सामान्य से अधिक ठंड के कारण चीनी की मांग घटी है। चीनी क्षेत्र से जुड़े एक संगठन ने आज कहा कि 2025-26 सीजन में भारत में चीनी की खपत लगभग 4,00,000 टन घटकर 277 लाख टन होने का अनुमान है।

इंडियन शुगर ऐंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए) के महानिदेशक दीपक बालानी ने ‘आईएसएमए शुगर एनएक्सटी 2026’ सम्मेलन के दौरान अलग से बातचीत करते हुए कहा, ‘अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच चीनी की लदान पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 60,000 टन अधिक थी, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण मार्च में स्थिति बदल गई।’ 2024-25 सत्र में चीनी की खपत करीब 281 लाख टन थी

उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब इस कार्यक्रम में मौजूद रहे खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए चीनी निर्यात पर किसी भी तरह के प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार चीनी की न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाए जाने की उद्योग की मांग पर विचार कर रही है। सचिव ने कहा कि चीनी की कीमत स्थिर बनी हुई है और घरेलू आपूर्ति पर्याप्त होने के कारण कीमतों में तेजी आने की कोई संभावना नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि एथनॉल की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के इस्तेमाल पर विचार करने के लिए सरकारी अधिकारियों की समिति का गठन किया गया है, जिसमें पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण की मात्रा मौजूदा 20 प्रतिशत से अधिक किया जाना शामिल है।

 चोपड़ा ने कहा कि सरकार एथनॉल से जलने वाले स्टोव के इस्तेमाल की अनुमति दिए जाने की मांग पर भी विचार कर रही है, जिससे अतिरिक्त क्षमता का इस्तेमाल एक और जगह किया जा सके। उन्होंने कहा कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क कम किए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

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First Published - April 7, 2026 | 10:06 PM IST

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