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कच्चा तेल फिसला, पहुंचा 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे

Last Updated- December 07, 2022 | 11:00 PM IST

डीलरों ने बताया कि वॉल स्ट्रीट में आई गिरावट का प्रभाव यूरोप तक फैलने से वैश्विक मंदी की चिंता से न्यूयॉर्क तेल वायदा के बेंचमार्क अनुबंध की कीमत आज एशिया में 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई।


दोपहर के बाद न्यूयॉर्क के मुख्य करार, नवंबर डिलिवरी वाले लाइट स्वीट कच्चे तेल की कीमत कम होकर 89.96 डॉलर हो गई। बाद में इसमें तेजी आई और इसका कारोबार 90.45 डॉलर पर होते देखा गया। 16 सितंबर को नवंबर डिलिवरी वाले लंदन के ब्रेंट नॉर्थ सी क्रूड की कीमत पहले ही 90 डॉलर से कम चल रही थी।

एशियाई कारोबार में आज ब्रेंट करार का कारोबार 3.70 डॉलर कम, 86.55 डॉलर पर किया जा रहा था। वैश्विक तेल की कीमतों ने इस साल की शुरुआत में 100 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार किया था और जुलाई में 147 डॉलर प्रति बैरल के चरम तक पहुंचा था।

सिंगापुर के ऊर्जा बाजार विश्लेषक अर्गस मीडिया के उपाध्यक्ष जैसन फीयर ने कहा, ‘मेरे खयाल से अभी जारी गिरावट की केवल एक धुंधली तस्वीर देखने को मिल रही है।’ उन्होंने कहा कि मूल्य को प्रभावित करने वाले मौसमी या रातनीतिक कारकों के नहीं होने के कारण निवेशक ‘वित्तीय मुद्दों को लेकर चिंतित है।’

कल बीएनपी परिबा ने घोषणा की थी कि यह बीमार वित्तीय संस्थान फोर्टिस के बेल्जियम और लग्जेमबर्ग के परिचालनों पर नियंत्रण करने जा रही है। जर्मनी ने भी देश के चौथे सबसे बड़े बैंक हाइपो रियल एस्टेट को संकट से उबारने के लिए एक सरकारी-निजी राहत योजना पक्का किया है।

जर्मन सरकार ने सभी बैंकों की व्यक्तिगत जमाओं के सुरक्षित होने की घोषणा (ब्लैंकेट गारंटी) की है ताकि हड़बड़ी में पैसे निकालने की नौबत से नहीं निपटना पड़े। सिडनी स्थित कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के कमोडिटी स्ट्रेटजिस्ट डेविड मूर ने कहा, ‘भारी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंदी का जोखिम, जिसका विस्तार कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं में हो रहा है, बढ़ा है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा।’

First Published - October 7, 2008 | 12:13 AM IST

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