पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव तेज होने से दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका असर तेल की कीमतों पर भी दिखा। शुक्रवार को ब्रेंट और WTI दोनों में तेजी रही। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर में बड़ी मजबूती नहीं दिखी, क्योंकि महंगाई के नरम आंकड़ों ने ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल दी हैं।
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 84.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि WTI क्रूड 79.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों बेंचमार्क में करीब 1% की तेजी रही। पूरे सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में करीब 12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। एजेंसी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल के पास एक तेल टैंकर को निशाना बनाया है। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नाकाबंदी लागू कर दी गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला तो आगे और कार्रवाई की जा सकती है।
तनाव के बीच दुनिया के दो सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग भी चर्चा में हैं। पहला होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में तेज गिरावट आई है। यह दुनिया के सबसे बड़े तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
दूसरा बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला होता है तो इस समुद्री रास्ते को बंद कर दिया जाए। अगर ऐसा होता है तो वैश्विक तेल सप्लाई पर और दबाव बढ़ सकता है।
आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के समय डॉलर मजबूत होता है, लेकिन इस बार अमेरिकी महंगाई के नरम आंकड़ों ने डॉलर की तेजी को सीमित कर दिया। शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स करीब 100.7 के स्तर पर स्थिर रहा, लेकिन पूरे सप्ताह इसमें कमजोरी देखने को मिली।
अमेरिका में जून महीने की उपभोक्ता महंगाई उम्मीद से कम रही। वहीं थोक महंगाई के आंकड़ों में भी गिरावट दर्ज की गई। खुदरा बिक्री बाजार के अनुमान के मुताबिक रही, जबकि बेरोजगारी भत्ते के लिए नए आवेदन घटकर 2.08 लाख रह गए, जो करीब दो महीने का सबसे निचला स्तर है।
इन आंकड़ों के बाद बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जुलाई में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। हालांकि सितंबर की बैठक को लेकर निवेशकों की राय अभी भी बंटी हुई है।