facebookmetapixel
Advertisement
RBI की सख्ती! जब्त मकानों और जमीनों पर अब नहीं चलेगी देरी, 7 साल में करना होगा निपटानरुपया क्यों हो रहा है कमजोर? RBI की बड़ी योजना पर नहीं मिला वैसा रिस्पॉन्स, अब बढ़ी चिंताअमेरिका-ईरान तनाव से फिर चढ़ा कच्चा तेल, ब्रेंट 85 डॉलर के करीब; डॉलर पर क्यों बना दबाव?₹62,500 करोड़ की स्कीम का किन मोबाइल कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा? मैन्युफैक्चरिंग के लिए बनेगी गेमचेंजरNCLT के फैसले से बदली मैकलॉयड की किस्मत, चाय बागानों की बिक्री को मिली हरी झंडीHUL की ग्रोथ पर भरोसा, ICICI Securities ने BUY रेटिंग रखी बरकरार; 32% तक तेजी की उम्मीदStock Market Today: GIFT Nifty के पॉजिटिव संकेत, एशियाई बाजारों में गिरावट; ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर के पारJSW MG का बड़ा दांव! ADAPT प्लेटफॉर्म से आएंगी नई EV और Hybrid SUV, बदल सकती है भारत के EV बाजार की तस्वीरटाइल इंडस्ट्री पर दबाव, MDF आयात बढ़ा… ऐसे माहौल में किन शेयरों पर रखें नजर? ब्रोकरेज ने बताए टॉप पिकअब ज्यादा माइलेज और कम प्रदूषण! CAFE 2027 ड्राफ्ट से ऑटो कंपनियों पर बढ़ेगी सख्ती, EV को मिलेगा बड़ा फायदा

अमेरिका-ईरान तनाव से फिर चढ़ा कच्चा तेल, ब्रेंट 85 डॉलर के करीब; डॉलर पर क्यों बना दबाव?

Advertisement

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर के करीब पहुंचा। होर्मुज और बाब अल मंडेब को लेकर बढ़ी चिंता, जानिए तेल और डॉलर पर क्या पड़ा असर

Last Updated- July 17, 2026 | 9:19 AM IST
crude oil

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव तेज होने से दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका असर तेल की कीमतों पर भी दिखा। शुक्रवार को ब्रेंट और WTI दोनों में तेजी रही। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर में बड़ी मजबूती नहीं दिखी, क्योंकि महंगाई के नरम आंकड़ों ने ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल दी हैं।

कच्चे तेल में क्यों आई तेजी?

शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 84.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि WTI क्रूड 79.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों बेंचमार्क में करीब 1% की तेजी रही। पूरे सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में करीब 12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। एजेंसी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल के पास एक तेल टैंकर को निशाना बनाया है। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नाकाबंदी लागू कर दी गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला तो आगे और कार्रवाई की जा सकती है।

दो अहम समुद्री रास्तों पर बढ़ी चिंता

तनाव के बीच दुनिया के दो सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग भी चर्चा में हैं। पहला होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में तेज गिरावट आई है। यह दुनिया के सबसे बड़े तेल परिवहन मार्गों में से एक है।

दूसरा बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला होता है तो इस समुद्री रास्ते को बंद कर दिया जाए। अगर ऐसा होता है तो वैश्विक तेल सप्लाई पर और दबाव बढ़ सकता है।

डॉलर क्यों नहीं हो पाया मजबूत?

आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के समय डॉलर मजबूत होता है, लेकिन इस बार अमेरिकी महंगाई के नरम आंकड़ों ने डॉलर की तेजी को सीमित कर दिया। शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स करीब 100.7 के स्तर पर स्थिर रहा, लेकिन पूरे सप्ताह इसमें कमजोरी देखने को मिली।

महंगाई के आंकड़ों ने बदली उम्मीदें

अमेरिका में जून महीने की उपभोक्ता महंगाई उम्मीद से कम रही। वहीं थोक महंगाई के आंकड़ों में भी गिरावट दर्ज की गई। खुदरा बिक्री बाजार के अनुमान के मुताबिक रही, जबकि बेरोजगारी भत्ते के लिए नए आवेदन घटकर 2.08 लाख रह गए, जो करीब दो महीने का सबसे निचला स्तर है।

इन आंकड़ों के बाद बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जुलाई में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। हालांकि सितंबर की बैठक को लेकर निवेशकों की राय अभी भी बंटी हुई है।

Advertisement
First Published - July 17, 2026 | 8:53 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement