बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने की अधिसूचना जारी करने के बाद भारत को अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर प्रस्तावित धारा 301 के तहत लगाए जाने वाले शुल्क में कुछ नरमी किए जाने की उम्मीद है। एक सरकारी अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने शुल्क में बदलाव के किसी विशिष्ट आंकड़े का उल्लेख किए बगैर कहा, ‘धारा 301 की जांच के बाद लगने वाले शुल्क में कुछ राहत मिलनी चाहिए।’
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने पिछले महीने धारा 301 के तहत बंधुआ मजदूरी से जुड़े आयात की जांच के बाद भारत सहित कई अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव दिया था। यूएसटीआर ने इसी जांच के तहत पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मेक्सिको और कनाडा सहित कुछ चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं पर 10 प्रतिशत के कम शुल्क का प्रस्ताव रखा है। कम शुल्क इश आधार पर लगाया गया है कि उन्होंने बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए ‘आंशिक व्यवस्था’ लागू की है।
इस बीच भारत सरकार ने इस सप्ताह बंधुआ मजदूरी का उपयोग करके निर्मित वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। वाणिज्य एवं उद्योग महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी इस अधिसूचना में बंधुआ मजदूरी को ‘किसी भी व्यक्ति से किसी दंड की धमकी के तहत कराए गए सभी कार्य या सेवा’ के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसके लिए उक्त व्यक्ति ने स्वेच्छा से स्वयं को प्रस्तुत नहीं किया है, जैसा कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की बंधुआ मजदूरी कन्वेंशन में परिभाषित है।
यह अधिसूचना भारत को बंधुआ मजदूरी के संबंध में उसी अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप लाती है जिसका उपयोग अमेरिका घरेलू स्तर पर करता है। ऐसे में भारत को अब यूएसटीआर की जांच पर अंतिम रिपोर्ट में भारतीय सामानों के लिए बेहतर शुल्क परिणाम की उम्मीद है, जो संभवतः इस महीने जारी हो सकती है।
यूएसटीआर ने धारा 301 के तहत भारत के खिलाफ अतिरिक्त क्षमता के आरोपों को लेकर एक और जांच शुरू की है, जिसकी मसौदा रिपोर्ट अभी जारी होनी बाकी है। अमेरिकी व्यापार अधिनियम का यह खंड अमेरिका को उन व्यापार प्रथाओं की जांच करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति देता है जिन्हें वह अमेरिका के कारोबार के लिए हानिकारक मानता है। धारा 301 के तहत भारत के खिलाफ अमेरिकी जांच को डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा अप्रैल 2025 में आपातकालीन आर्थिक शक्तियों अधिनियम के तहत लगाए गए जवाबी शुल्क के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने फरवरी में उन शुल्कों को रद्द कर दिया था।
वहीं भारत और अमेरिका व्यापार समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं, जिसमें संभवतः भारत की चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा, जिसमें अमेरिका की भारत के खिलाफ धारा 301 जांच भी शामिल है।