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SEBI का नया एक्शन! बिना अनुमति निवेश पर रोक, बोर्ड सदस्यों के लिए लागू हुए सख्त नियम

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SEBI ने बोर्ड सदस्यों के लिए नई आचार संहिता लागू कर निवेश, हितों के टकराव, डिस्क्लोजर और खुद को कार्यवाही से अलग करने के नियम पहले से अधिक सख्त कर दिए हैं।

Last Updated- July 16, 2026 | 8:06 AM IST
SEBI
Representative image

बाजार नियामक सेबी ने बोर्ड सदस्यों के अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं। इसमें हितों के टकराव पर एक विस्तृत संहिता शामिल की गई है और डिस्क्लोजर, खुद को कार्यवाही से अलग करने और बिना इजाजत वाले निवेशों से जुड़े नियमों को काफी सख्त बनाया गया है। नई संहिता 2008 में लागू की गई 5 पेज की संहिता की तुलना में काफी बदली हुई है। इसमें व्यापक नैतिक दिशानिर्देशों के बजाय नियमों के पालन पर ज्यादा जोर दिया गया है।

संशोधित संहिता में साफ कहा गया है कि पूर्णकालिक सदस्य और उनके परिवार वाले अपने कार्यकाल के दौरान उन योजनाओं में नया निवेश नहीं कर सकते, जिनकी इजाजत नहीं है। साथ ही, ऐसी होल्डिंग के बारे में उनके लिए पूरी जानकारी देना जरूरी होगा।

17 पेज की नई आचार संहिता में बोर्ड सदस्यों के लिए उन निवेशों को संभालने के विकल्प बताए गए हैं, जिनकी इजाज़त नहीं है और जो उनके कार्यकाल की शुरुआत से पहले से ही उनके पास हैं। पूर्णकालिक सदस्यों के पास यह विकल्प होगा कि वे या तो इन निवेशों को बेच दें या फिर अपना कार्यकाल के पूरा होने तक इन्हें फ्रीज कर दें। वे पहले से मंजूरी लेकर इन निवेशों को बेच भी सकते हैं या फिर सेबी के ऑफिस ऑफ एथिक्स ऐंड कंप्लायंस को इन्हें बेचने का ट्रेडिंग प्लान बता सकते हैं।

नियामक ने इससे पहले कर्मचारियों के लिए आचार संहिता को सख्त किया था। चूंकि पूर्णकालिक सदस्य और बोर्ड के अन्य सदस्यों को बाहर से या दूसरी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के तौर पर नियुक्त किया जा सकता है, इसलिए उनके लिए एक अलग आचार संहिता बनाई गई है। इसके अलावा, नियामक के भेदिया कारोबार पर रोक लगाने वाले नियमों के तहत पूर्णकालिक सदस्य को इनसाइडर माना जाएगा और वे इन नियमों के पालन के लिए बाध्य होंगे।

पूर्व चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच पर हितों के टकराव के आरोप लगने के बाद बाजार नियामक की आचार संहिता जांच के घेरे में आ गई थी। नई आचार संहिता में डिस्क्लोजर की अनिवार्यता को भी मजबूत किया गया है। इसके तहत सदस्यों को समय-समय पर अपनी वित्तीय संपत्तियों, देनदारियों, अचल संपत्ति और पेशेवर हितों के साथ-साथ तय समय-सीमा के भीतर किसी भी अहम बदलाव की जानकारी देनी होगी।
पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से सेबी ने खुद को कार्यवाही से अलग करने की विस्तृत प्रक्रिया तय की है।

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First Published - July 16, 2026 | 8:06 AM IST

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