भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को कहा कि बैंकों को फंसे कर्ज के बदले सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से मिली अचल संपत्तियों का निपटान 7 साल के भीतर करना होगा। बैंक सिक्योरिटाइजेशन ऐंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ इनैंशियल असेट ऐंड इन्फोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट (सरफेसी) ऐक्ट के तहत कर्ज चुका न पाने वालों की संपत्ति का अधिग्रहण करते हैं।
रिजर्व बैंक ने संशोधित दिशानिर्देश में कहा, ‘बैंक को चिह्नित गैर वित्तीय संपत्ति (एसएनएफए) को बैंक की नीति के तहत निर्धारित अधिकतम अवधि के भीतर निपटाना होगा, जो अधिकतम 7 साल होगी। बैंक को सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से जल्द से जल्द एसएनएफए का निपटान करने के लिए सभी प्रयास करने होंगे। सार्वजनिक नीलामी के लिए बैंक को सरफेसीअधिनियम, 2002 में निहित नीलामी के सिद्धांतों का पालन करना होगा।’
रिजर्व बैंक के नए निर्देश एसएनएफए को नियंत्रित करने वाले एक नए विवेकपूर्ण ढांचे का हिस्सा है। संशोधित दिशानिर्देश 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होंगे।
रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंक आम तौर पर अपने मुख्य व्यावसायिक कार्यों में अचल संपत्तियों का लेनदेन नहीं करते हैं और कर्ज लेने वालों से इस तरह की संपत्तियों का अधिग्रहण किया जाता है।