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Budget Expectations 2026: दवा उद्योग ने बजट में रिसर्च एंड डेवलपमेंट संबंधी रियायतों, नियामक ढांचे के सरलीकरण की मांग की

आगामी बजट में रोगी-प्रथम दृष्टिकोण के साथ देश के स्वास्थ्य सेवा एवं जीवन विज्ञान परिवेश को और मजबूत करने का अवसर है

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- January 12, 2026 | 7:38 PM IST

सरकार को आगामी बजट में घरेलू दवा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंसेंटिव और क्लिनिकल रिसर्च के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने पर विचार करना चाहिए ताकि इसे 2030 तक इनोवेशन-आधारित 130 अरब अमेरिकी डॉलर के सेक्टर में बदलाव लाने में मदद मिल सके। उद्योग जगत के संगठनों ने यह बात कही।

नीति निर्माताओं को आगामी केंद्रीय बजट (वित्तीय वर्ष 2026-27) में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) स्ट्रक्चर को युक्तिसंगत बनाने, भारित अनुसंधान एवं विकास कटौती की बहाली और अनुपालन व नियामक ढांचे के सरलीकरण पर भी विचार करना चाहिए।

रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंसेंटिव की जरूरत

इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस (IPA) के महासचिव सुदर्शन जैन ने बयान में कहा, ‘‘उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंसेंटिव प्रोत्साहन चाहता है जो भारत की इनोवेशन संबंधी महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप हो, वैज्ञानिक परिवेश को बढ़ावा दे और मात्रा-आधारित मॉडल से इनोवेशन-आधारित दवा सेक्टर में परिवर्तन का समर्थन करे।’’

उन्होंने कहा कि छह दशकों से ज्यादा समय तक जुझारूपन एवं इनोवेशन के मजबूत प्रदर्शन के साथ यह उद्योग 2030 तक 120-130 अरब अमेरिकी डॉलर और अंततः 2047 तक 450 अरब अमेरिकी डॉलर के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तैयार है।

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दवाओं पर जीएसटी में हो सुधार

भारत में अनुसंधान-आधारित वैश्विक दवा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘ऑर्गेनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया’ (ओपीपीआई) ने कहा कि आगामी बजट में रोगी-प्रथम दृष्टिकोण के साथ देश के स्वास्थ्य सेवा एवं जीवन विज्ञान परिवेश को और मजबूत करने का अवसर है।

ओपीपीआई के महानिदेशक अनिल मतई ने कहा, ‘‘वित्तीय दृष्टिकोण से, दवाओं एवं चिकित्सकीय उत्पादों पर जीएसटी का युक्तिकरण, इनपुट टैक्स क्रेडिट पर स्पष्टता, महत्वपूर्ण कच्चे माल और उन्नत विनिर्माण से जुड़े कच्चे के माल के लिए अधिक लक्षित सीमा शुल्क राहत से लागत के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि अनुसंधान एवं विकास से जुड़े कर प्रोत्साहनों को फिर से शुरू करने या मजबूत करने तथा नैदानिक ​​अनुसंधान के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने से नवाचार-आधारित वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और अधिक बढ़ावा मिल सकता है। मतई ने कहा, ‘‘हम उन उपायों की भी उम्मीद कर रहे हैं जो नियामक पूर्वानुमान में सुधार करें, नैदानिक ​​अनुसंधान को प्रोत्साहित करें और उन्नत विनिर्माण का समर्थन करें साथ ही यह सुनिश्चित करें कि गुणवत्ता एवं सुरक्षा महत्वपूर्ण बनी रहे।’’

(PTI इनपुट के साथ)

First Published : January 12, 2026 | 7:36 PM IST