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सावधान! प्री-अप्रूव्ड लोन के मैसेज कहीं खाली न कर दें आपका अकाउंट, मानें एक्सपर्ट की ये सलाहMarket This Week: मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स-निफ्टी 5% से ज्यादा टूटे; निवेशकों के ₹19 लाख करोड़ डूबेEPFO Rules: क्या न्यू लेबर कोड के बाद PF नियमों में होने जा रहा है बदलाव? सरकार ने बताई पूरी सच्चाईईरान युद्ध से रूस मालामाल! रोजाना कर रहा 150 मिलियन डॉलर की कमाईईरान संकट नहीं बल्कि एक खबर ने बाजार को दिया तगड़ा झटका! अमेरिका से है कनेक्शनमहंगाई फिर सिर उठाने लगी! आगे और बढ़ने का खतरा, रिपोर्ट्स ने दिए बड़े संकेतPM-Kisan 22nd Installment: PM मोदी आज जारी करेंगे 22वीं किस्त, जानें किन किसानों को मिलेगा पैसा13 मार्च, 6 साल पहले- 13% गिरा था सेंसेक्स, लाखों करोड़ का हुआ था नुकसान; आज फिर 13 तारीख ने डरायाऑटो सेक्टर में रफ्तार बरकरार: फरवरी में PVs बिक्री 10.6% बढ़ी, युद्ध ने बढ़ाई टेंशनटूटते बाजार में BUY करें ये 5 शेयर- ब्रोकरेज की सलाह, लॉन्ग टर्म में 51% तक आ सकता है रिटर्न

लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

वि​​धि की भावना का ख्याल

रिलायंस कैपिटल की निस्तारण प्रक्रिया को इस सप्ताह राष्ट्रीय कंपनी लॉ पंचाट की मुंबई शाखा के समक्ष 12 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया गया। पीठ का यह निर्णय न केवल इस मामले से संबं​धित पक्षकारों को प्रभावित करेगा ब​ल्कि यह ऋणशोधन निस्तारण प्रक्रिया पर भी असर डालेगा। इस प्रक्रिया पर […]

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नैनो उर्वरकों के फायदे

नैनो यूरिया की सफलता के बाद, अब दूसरे सबसे अ​धिक खपत वाले उर्वरक डीएपी (डाई अमोनियम फॉस्फेट) के नैनो संस्करण को जैव सुरक्षा और विषाक्तता परीक्षणों में मंजूरी मिल गई है और इसके साथ ही अगले खरीफ सत्र में इसे खेतों में इस्तेमाल करने की औपचारिक स्वीकृति का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। ये […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

नागरिक समाज और सरकार

नागरिक समाज और भारत सरकार के बीच पिछले कुछ समय से अच्छे ताल्लुकात नहीं हैं लेकिन हाल के दिनों में यह टकराव बढ़ गया है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार नियमन की सख्ती के बाद सन 2017 से 2021 के बीच करीब 6,677 गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेशी फंडिंग पाने से संबंधित लाइसेंस […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

नोटबंदी पर बहस की प्रासंगिकता

सरकार द्वारा नवंबर 2016 में उच्च मूल्य वाले नोट बंद करने के फैसले पर हो रही प्रक्रियागत बहस अब समाप्त हो गई है। सर्वोच्च न्यायालय के एक संवैधानिक पीठ ने सोमवार को 4:1 के बहुमत से प्रक्रिया का समर्थन किया और कहा कि नोटबंदी की पूरी कवयद वैध तथा समानता के परीक्षण को संतुष्ट करने […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

बाजार रुझान

वर्ष 2023 में भारत के शेष विश्व की तुलना में तेज वृद्धि हासिल करने की उम्मीद है लेकिन यह अच्छी खबर अस्थायी ही है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की खराब हालत की आशंका भी इसके समांतर चल रही है। मुद्रास्फीति बढ़ी हुई है और भारतीय रिजर्व बैंक सहित अधिकांश केंद्रीय बैंक इसे नियंत्रित करने के लिए […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

खतरनाक कचरे के खतरे

देश में कचरा प्रबंधन उद्योग की अनियमित प्रकृति के कारण हमारा देश दुनिया भर के कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गया है। यह बात हमारे पर्यावरण और जन स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदेह है। इसके लिए काफी हद तक निगरानी और नियंत्रण की कमजोरी, भ्रष्टाचार और सबसे बढ़कर गरीब भारतीय श्रमिकों की मौजूदगी जिम्मेदार है […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

धीमी वृद्धि वाला वर्ष

वर्ष 2022 को नकदी की आसान उपलब्धता की समा​प्ति वाला वर्ष माना जा सकता है। कम से कम अब तक तो ऐसा ही है। यही वजह है कि आने वाला वर्ष ऊंची ब्याज दरों और धीमी वै​श्विक वृद्धि वाला होगा। भारत में भी वि​​भिन्न चैनलों के जरिये आ​र्थिक नतीजों पर इसका असर पड़ेगा। थोड़ी बहुत […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

चारे की कमी

सन 1970 के दशक में हुई श्वेत क्रांति के बाद से ही देश में डेरी क्षेत्र में मजबूत और ऊंची वृद्धि देखने को मिलती रही है लेकिन अब यह मुश्किल दौर से गुजरता नजर आ रहा है। इसकी मुश्किलें पशु आहार तथा चारे की कम आपूर्ति एवं ऊंची लागत की वजह से पैदा हुई हैं। […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

कानून व्यवस्था

एक बहुप्रयोजन वाले विधेयक की मदद से छोटे अपराधों की आपरा​धिकता समाप्त करने तथा 19 मंत्रालयों के तहत आने वाले 42 अ​धिनियमों के 183 प्रावधान संशो​धित करने को कारोबारी सुगमता का माहौल सुधारने वाले तथा न्यायिक व्यवस्था की समस्याएं कम करने वाले उपाय के रूप में पेश किया जा रहा है। यह मोदी सरकार के […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

राजकोषीय सुदृढ़ीकरण को जोखिम

केंद्र सरकार ने गत सप्ताह यह निर्णय लिया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना बंद की जाएगी। यह योजना 28 महीने पहले इसलिए शुरू की गई थी ताकि महामारी के दौरान आबादी के वंचित वर्ग को सहायता पहुंचाई जा सके। इसके तहत उन्हें पांच किलोग्राम चावल या गेहूं नि:शुल्क दिया जा रहा था। अर्थव्यवस्था में […]

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