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कंपनियों में पूंजी जुटाने की होड़, 62,000 करोड़ रुपये के आईपीओ दस्तावेज जमा

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई 08 27, 2017

पूंजी उगाही की कवायद में उद्योग जगत

► करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ और क्यूआईपी आ सकते हैं बाजार में
2017 में करीब 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ आने की उम्मीद
11 बीमा कंपनियां आईपीओ के जरिये जुटाएंगी 45 से 50 हजार करोड़ रुपये
सार्वजनिक क्षेत्र के कर्ई उपक्रमों के भी इस साल आ सकते हैं आईपीओ

घरेलू शेयर बाजार में तेजी और विदेशी तथा घरेलू संस्थागत निवेशकों के सक्रिय निवेश को देखते भारतीय उद्योग जगत रिकॉर्ड पूंजी जुटाने की संभावना तलाश रहा है। बाजार पर नजर रखने वाली प्राइम डेटाबेस द्वारा संग्रहीत आंकड़ों के अनुसार 150 से अधिक कंपनियां अनुमानित 2.5 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की इच्छा जाहिर कर चुकी हैं। यह पूंजी आईपीओ, पात्र संस्थागत नियोजन तथा एफपीओ के जरिये जुटाई जा सकती है। इसमें से करीब 60 फीसदी रकम बीएफएसआई (बीमा, वित्तीय सेवाएं तथा बीमा) क्षेत्र की कंपनियों द्वारा जुटाई जाएगी।

150 कंपनियों में से 94 कंपनियों के करीब 1 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ अगले कुछ महीनों में बाजार में आ सकते हैं। इनमें से एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस (10,000 करोड़ रुपये का निर्गम), जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (10,000 करोड़ रुपये), नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (10,000 करोड़ रुपये), न्यू इंडिया एश्योरेंस (7,000 करोड़ रुपये) और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस (7,000 करोड़ रुपये) प्रमुख हैं।  

हालांकि सभी कंपनियां इस साल या अगले वित्त वर्ष में आईपीओ नहीं लाएंगी, लेकिन 26 कंपनियां पहले ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास 62,000 करोड़ रुपये के निर्गम लाने के लिए दस्तावेज जमा करा चुकी हैं, जिनमें से कम से कम आधी रकम इसी साल जुटाई जा सकती है। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, 'पूंजी जुटाने के मामले में यह साल सबसे अच्छा हो सकता है।' इस साल भारतीय बाजार का प्रदर्शन दुनिया के प्रमुख बाजारों में से एक है और बीएसई सेंसेक्स इस साल अब तक 18.7 फीसदी और निफ्टी 20.4 फीसदी चढ़ चुका है।

नोमुरा इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख- निवेश बैंकिंग उत्पल ओझा ने कहा, 'बीमा, परिसंपत्ति प्रबंधन तथा लॉजिस्टिक्स जैसे नए क्षेत्रों की कंपनियां बाजार में पूंजी जुटाने के लिए आगे आ सकती हैं।' आने वाले महीनों में 10 बीमा कंपनियों के करीब 40,000 करोड़ रुपये के आईपीओ बाजार में आ सकते हैं। सरकार भी अपने विनिवेश लक्ष्य के तहत आने वाले महीनों में कुछ कंपनियों के आईपीओ बाजार में ला सकती है। इनमें रेलवे से जुड़ी नौ कंपनियां, पांच बीमा कंपनियां और चार रक्षा क्षेत्र के उपक्रम शामिल हैं। इसी तरह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) के जरिये पूंजी जुटाने की कवायद में लगे हैं। बाजार की स्थिति अच्छी है और नकदी प्रवाह भी पिछले साल की तुलना में बेहतर है, ऐसे में कारोबार को पटरी पर लाने की भरोसेमंद योजना तथा फंसे कर्ज के समाधान के बाद निवेशक इनमें पैसा लगाने के इच्छुक हो सकते हैं।

जून में भारतीय स्टेट बैंक ने क्यूआईपी के माध्यम से 15,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई थी। दो अन्य बैंक कोटक महिंद्रा बैंक और येस बैंक ने भी रकम जुटाने के लिए क्यूआईपी का ही सहारा लिया था। इस साल अब तक 17 निर्गमों के जरिये 34,000 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, जो 2009 में क्यूआईपी से जुटाए गए रिकॉर्ड 34,676 करोड़ रुपये से अधिक हो सकते हैं। इसके अलावा बजाज फाइनैंस और पीरामल इंटरप्राइजेज भी 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का क्यूआईपी ला सकती है। निर्गमों की भरमार के बावजूद विश्लेषकों को निकट भविष्य में मांग को लेकर किसी तरह की चुनौती नजर नहीं आ रही है। उभरते बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत बनी हुई है और विदेशी निवेशक भी शुद्घ खरीदार बने हुए हैं। घरेलू म्युचुअल फंडों की ओर से भी बाजार में रिकॉर्ड निवेश किया जा रहा है।
Keyword: पूंजी, आईपीओ, क्यूआईपी, सार्वजनिक क्षेत्र, शेयर बाजार, संस्थागत निवेशक, निवेश, रिकॉर्ड,
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