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रुपये की कमजोरी से अटके PLI दावे! ऑटो कंपनियों ने सरकार से लगाई गुहार

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विनिमय दर तय न होने और रुपये की कमजोरी के चलते ऑटो कंपनियों के PLI आवेदन व पुनः सत्यापन अटक गए हैं।

Last Updated- June 23, 2026 | 8:20 AM IST
Auto sector Stocks
Representative image

ऑटो कंपनियों ने वाहन क्षेत्र की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत कई नए आवेदनों और पुनः सत्यापन के अनुरोधों को रोककर रखा हुआ है। इसकी वजह यह है कि भारी उद्योग मंत्रालय और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) ने अभी तक चालू वित्त वर्ष के लिए इस योजना के दायरे में आने वाले वाहनों में घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) की गणना के लिए विनिमय दर को अंतिम रूप नहीं दिया है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड को पता चला है कि इस मसले पर उद्योग की चिंता को दर्शाते हुए सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) ने पिछले महीने दो बार सरकार को पत्र लिखा और शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया है।

वाहन विनिर्माताओं ने पीएलआई योजना के तहत डीवीए गणना के लिए प्रचलित बाजार दरों के बजाय पिछले वर्षों की औसत विनिमय दरों का उपयोग करने की मांग की है। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण रुपये का अवमूल्यन हुआ जिससे डीवीए के स्तर कृत्रिम रूप से कम हो गए हैं। लिहाजा, इस प्रोत्साहन के दावे के दौरान कुछ उत्पाद आवश्यक सीमा से नीचे रह सकते हैं।

25,938 करोड़ रुपये की इस ऑटो पीएलआई योजना में पात्र होने के लिए किसी वाहन के मॉडल में आयात की गई सामग्री की मात्रा 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यानी उसकी कुल कीमत (रुपये में) के आधे से कम हिस्से का ही आयात किया जा सकता है। डीवीए की गणना मॉडल की एक्स-फैक्टरी कीमत में से आयातित सामग्री की कीमत घटाकर की जाती है।

इस मामले में सायम ने 3 जून को भारी उद्योग मंत्रालय को अपना पहला पत्र भेजा और फिर 17 जून को एआरएआई को दूसरा पत्र भेजा। एआरएआई भारी उद्योग मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है।

सायम ने 3 जून के अपने पत्र में कहा कि इस योजना के शुरुआती दौर में डॉलर की विनिमय दर लगभग 82 से 83 रुपये प्रति डॉलर (वित्त वर्ष 23 के स्तर पर) थी, जो अब बढ़कर लगभग 96 रुपये प्रति डॉलर हो चुकी है। यानी इसमें करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसमें यह भी कहा गया है कि इसके अलावा विनिर्माताओं को उन आयातित पुर्जों और प्रणालियों की बढ़ी हुई लागत का भी सामना करना पड़ रहा है जो स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं होती हैं।

सायम ने कहा कि पिछली तीन तिमाहियों में विदेशी मुद्रा की दरों में आए ऐसे अभूतपूर्व उतार-चढ़ाव और पुर्जों की लागत में बढ़ोतरी का असर डीवीए की गणना पर पड़ रहा है, भले ही कंपनियों ने स्थानीयकरण को बढ़ा दिया हो। उन कारणों से डीवीए नियमों के पालन पर इसका ‘अनचाहा बुरा असर’ पड़ रहा है जो वाहन विनिर्माताओं के नियंत्रण से बाहर हैं।

उद्योग के संगठन ने भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से मई 2022 में जारी एक स्पष्टीकरण का भी जिक्र किया। इसमें माना गया था कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव या कच्चे माल की कीमतों में बदलाव की वजह से डीवीए के स्तर गिर सकते हैं, भले ही कंपनी की आपूर्ति श्रृंखला में कोई बड़ा बदलाव न हुआ हो।

इस समस्या को हल करने के लिए सायम ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह मौजूदा वित्त वर्ष के लिए नए आवेदनों और पुन: सत्यापन वाले उत्पादों के मामले में योजना की अवधि की शुरुआत में लागू विनिमय दर पर विचार करे। उस समय रुपया प्रति डॉलर लगभग 82 से 83 के भाव पर कारोबार कर रहा था।

एआरएआई को 17 जून को भेजे गए अपने पत्र में सायम ने निश्चित विनिमय दर तय करने के लिए एक अलग तरीका सुझाया है।

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First Published - June 23, 2026 | 8:20 AM IST

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