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डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एनपीसीआई करेगी ब्रांडिंग में बड़ा बदलाव

उद्योग जगत के लोगों का कहना है कि इससे एनपीसीआई को विशेष प्रौद्योगिकी वाली प्रतिभा के लिए प्रतिस्पर्धा करने में भी मदद मिलेगी।

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अजिंक्या कवाले   
Last Updated- March 06, 2026 | 9:24 AM IST

नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) अपने ब्रांड को दुरुस्त करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य घरेलू एवं वैश्विक प्रोफाइल को मजबूत करना और कंपनी को प्रौद्योगिकी आधारित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाता के रूप में नए सिरे से स्थापित करना है।

यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब भारत के डिजिटल भुगतान में जबरदस्त तेजी ने एक असामान्य विरोधाभास पैदा कर दिया है। देश के करोड़ों उपयोगकर्ता यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई), रुपे कार्ड नेटवर्क और टोल भुगतान के लिए फास्टैग जैसे तमाम प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही लोग उस संस्थान को पहचानते हैं जो इन प्रणालियों का संचालन करता है। यही कारण है कि एनपीसीआई अपनी ब्रांड पहचान में व्यापक बदलाव करना चाहती है।

एनपीसीआई ने इस संबंध में जानकारी के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा पूछे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया। इस पहल का उद्देश्य एनपीसीआई की पहचान से जुड़ी व्यापक चुनौतियों से निपटना भी है। इसमें तकनीकी प्रतिभा को आकर्षित करना और संस्थान को भुगतान, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) एवं ब्लॉकचेन में काम के साथ एक डीपटेक कंपनी के रूप में स्थापित करना शामिल है।

एक सूत्र ने मजाकिया अंदाज में कहा, ‘कई लोगों को लगता है कि एनपीसीआई का मतलब न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया है जबकि यह केवल डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म संचालित करती है।’ उद्योग जगत के लोगों का कहना है कि इससे एनपीसीआई को विशेष प्रौद्योगिकी वाली प्रतिभा के लिए प्रतिस्पर्धा करने में भी मदद मिलेगी।

एनपीसीआई के दायरे में एनपीसीआई इंटरनैशनल, एनपीसीआई भारत बिलपे, एनपीसीआई भीम सर्विसेज और एनपीसीआई टेक सॉल्यूशंस जैसी कई सहायक कंपनियां शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य बड़े पैमाने पर सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण में एनपीसीआई की भूमिका को मजबूत करना भी है।

First Published : March 6, 2026 | 9:24 AM IST