आज का अखबार

निर्यात प्रोत्साहन योजना रॉडटेप की समीक्षा कर रही सरकार, जारी रखने पर होगा फैसला

रॉडटेप योजना निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों को इनपुट पर भुगतान किए गए अंतर्निहित गैर-क्रेडिट योग्य केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों को वापसी करती है।

Published by
श्रेया नंदी   
Last Updated- March 06, 2026 | 9:27 AM IST

केंद्र सरकार निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (रॉडटेप) योजना की समीक्षा कर रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य योजना जारी रहने का आकलन और औचित्य सिद्ध
करना है।

वित्त मंत्रालय ने समीक्षा का सुझाव दिया। यह समीक्षा व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इसका ध्येय दक्षता बढ़ाने के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं को युक्तिसंगत बनाना और मौजूदा योजनाओं का एकीकरण कर दोहराव कम करना है। संबंधित अधिकारी ने बताया कि इस बारे में अंतिम फैसला व्यय वित्त समिति लेगी। बिजनेस स्टैंडर्ड ने वित्त मंत्रालय को प्रश्न भेजे थे लेकिन खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला।

अधिकारी ने कहा, ‘इस योजना (अन्य योजनाओं के साथ) का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन किया जा रहा है।’ उन्होंने बताया कि योजना की उपयुक्तता का आकलन करने और इसमें संशोधन की आवश्यकता है या नहीं, इस पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने पांच वर्ष बतौर वित्त सचिव व्यापक तार्किकता और समेकन की कार्रवाई को शुरू किया था। रॉडटेप योजना 2021 में लागू हुई थी। यह योजना भारत के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों को इनपुट पर भुगतान किए गए अंतर्निहित गैर-क्रेडिट योग्य केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों को वापसी करती है। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि करों का निर्यात नहीं होना चाहिए। यह योजना निर्यात पर शून्य कर सुनिश्चित करती है और इससे निर्यात प्रतिस्पर्धी बनता है।

इस योजना ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के फैसले के बाद विवादास्पद मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) का स्थान लिया। डब्ल्यूटीओ के आदेश में कहा गया था कि एमईआईएस कई प्रकार की वस्तुओं के लिए निर्यात सब्सिडी देकर वैश्विक व्यापार निकाय के प्रावधानों का उल्लंघन करती है।

इस योजना की शुरुआत से ही इसका वार्षिक आवंटन लगभग 12,000 करोड़ से 18,000 करोड़ रुपये रहा है। हालांकि वित्त वर्ष 2027 के केंद्रीय बजट में आबंटन में 45 प्रतिशत की कटौती कर इसे लगभग 10,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 18,233 करोड़ रुपये आबंटित किए थे। इसके बाद सरकार ने योजना के तहत मिलने वाले लाभों को आधा कर दिया है – लिहाजा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निर्यातकों के लिए लागत बढ़ने की संभावना है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) के महानिदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय सहाय ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मानदंडों के अंतर्गत निर्यात पर शून्य कर लगाया जा सकता है। इसलिए यह योजना डब्ल्यूटीओ मानदंडों के अंतर्गत अप्रतिदेय करों पर छूट प्रदान करती है। यह करों की वापसी है (सब्सिडी नहीं)। इससे निर्यात प्रतिस्पर्धी बनता है।
सहाय ने कहा, ‘रॉडटेप जैसी योजनाएं, ड्यूटी ड्रॉबैक और माल एवं सेवा कर की वापसी के साथ मिलकर कर वापसी का व्यापक दायरा प्रदान करती हैं। इसलिए यह योजना जारी रहनी चाहिए।’

First Published : March 6, 2026 | 9:27 AM IST