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ऑलकार्गो का बड़ा प्लान! अगले 10 साल AI और डिजिटलीकरण पर दांव, लॉजिस्टिक्स सेक्टर में होगा बड़ा बदलाव

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ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स अगले 5-10 वर्षों में AI, डिजिटलीकरण और एकीकृत सप्लाई चेन समाधानों के जरिए कारोबार विस्तार और दक्षता बढ़ाने पर फोकस करेगी।

Last Updated- June 01, 2026 | 7:56 AM IST
Logistics
Representative image

ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स भारत की खपत और विनिर्माण पर आधारित वृद्धि पर फोकस कर रही है। अपने घरेलू काराबारों को मजबूती देने के लिए समूह ने हाल में पुनर्गठन किया है। कंपनी अपने एक्सप्रेस और कंसल्टेटिव लॉजिस्टिक्स (सीएल) विभागों के माध्यम से काम कर रही है। वह वृद्धि को रफ्तार देने के लिए वह प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (एआई) और एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला समाधानों पर दांव लगा रही है। प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) केतन कुलकर्णी ने प्राची पिसाल को दिए ऑनलाइन साक्षात्कार में कंपनी की रणनीति, ईंधन लागत और वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों पर बात की। बातचीत के अंश:

हाल के पुनर्गठन के बाद आने वाले कुछ वर्षों में ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स की रणनीतिक दिशा क्या होगी?

हमारी रणनीति भारतीय अर्थव्यवस्था में चल रहे संरचनात्मक बदलावों के अनुरूप है। चूंकि हमारा कारोबार मुख्य रूप से घरेलू बाजार पर केंद्रित है, इसलिए हमारी वृद्धि सीधे भारत की वृद्धि यात्रा से जुड़ी है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पहले यह उद्योग काफी बंटा हुआ सा था लेकिन अब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), ई-वे बिल, समर्पित माल ढुलाई गलियारे, भारतमाला और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी सरकारी पहलों के कारण इसमें अधिक दक्षता आ रही है और यह उद्योग औपचारिक होता जा रहा है। अगले 5 से 10 वर्षों में हमारा मुख्य ध्यान तकनीक, डिजिटलीकरण, अपनी मौजूदगी बढ़ाने और सेवाओं की गुणवत्ता लगातार पर रहेगा। ग्राहकों के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण चीजें भरोसेमंद सेवा और बड़े पैमाने पर संचालन होता है।

पुनर्गठन से आपके राजस्व में कैसे सुधार होगा?

पुनर्गठन के बाद हम अपने ग्राहकों के साथ ज्यादा जुड़े हैं। अब ग्राहकों को एक्सप्रेस, सीएल और परिवहन सेवाओं के लिए अलग-अलग सेवा प्रदाताओं से संपर्क करने की जररूत नहीं है। हम एक ही मंच से आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े सभी समाधान दे सकते हैं। इससे परिचालन दक्षता बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धी कीमतों में मदद मिलेगी और ग्राहकों के साथ जुड़ाव मजबूत होगा। लॉजिस्टिक्स में पैमाना बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यहां कीमतों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है। हमारा यह एकीकृत मॉडल बाजार में हमारी स्थिति काफी मजबूत बनाता है।

पश्चिम एशिया संकट का आपके कारोबार पर क्या असर पड़ रहा है?

इस संकट का सबसे तत्काल असर ईंधन की कीमतों पर पड़ा है। पिछले कुछ दिनों में डीजल के दामों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि हमारा कारोबार मुख्य रूप से घरेलू बाजार पर केंद्रित है। ऐसे में इसका व्यापक प्रभाव उन कंपनियों की तुलना में काफी सीमित है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बहुत अधिक निर्भर हैं। भारत में खपत और उत्पादन की स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है। अप्रैल और मई के दौरान जो हमने देखा है, उस आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक परिदृश्य काफी सकारात्मक दिखता है।

डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से मुनाफे पर क्या असर पड़ रहा है?

हम डीजल कीमत वृद्धि पर पारदर्शी तरीका अपनाते हैं। इसकी जानकारी ग्राहकों को पहले से दी जाती है और समय-समय पर इसमें संशोधन किया जाता है। इससे ईंधन लागत में हुई बढ़ोतरी को व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है।

क्या पेट्रोल या डीजल की उपलब्धता को लेकर कोई समस्या आ रही है?

फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। हम अपने ट्रक साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में हैं जिनमें से अनेक हमारे साथ कई दशकों से जुड़े हैं। हमारा काम अब भी डीजल से चल रहा है लेकिन जहां व्यावसायिक रूप से फायदा हो और ग्राहक की जरूरतों के अनुरूप हो, वहां चुनिंदा तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों का भी उपयोग किया जा रहा है।

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First Published - June 1, 2026 | 7:56 AM IST

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