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ग्रामीण बैंक शाखाओं में 60% क्रेडिट डिपॉजिट रेश्यो की दरकार

आरबीआई ने स्वीकार किया है कि कुछ जिलों में कर्ज कम लिया जा रहा है, जिसकी वजह वहां का खराब बुनियादी ढांचा और ऋण खपाने की कम क्षमता है।

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सुब्रत पांडा   
Last Updated- February 13, 2026 | 10:00 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ‘लीड बैंक योजना’ (एलबीएस) के लिए संशोधित दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया है। इसके तहत बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे देश भर में अपनी ग्रामीण और कस्बाई बैंक शाखाओं को मिलाकर 60 प्रतिशत का ‘ऋण-जमा अनुपात’ हासिल करें। इन मसौदा नियमों में बैंकों से कहा गया है कि वे ‘टियर-5’ श्रेणी के छोटे शहरों में कोर बैंकिंग (सीबीएस) सुविधा वाली शाखाएं खोलने को प्राथमिकता दें।

हालांकि बैंकों को इस ऋण-जमा अनुपात का लक्ष्य हर एक शाखा, जिले या क्षेत्र में पूरा करना जरूरी नहीं है। लेकिन, उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि अलग-अलग राज्यों या इलाकों के बीच ऋण-जमा अनुपात में बहुत ज्यादा अंतर न हो, ताकि ऋण के हिसाब से क्षेत्रीय असंतुलन को कम किया जाए।

आरबीआई ने स्वीकार किया है कि कुछ जिलों में कर्ज कम लिया जा रहा है, जिसकी वजह वहां का खराब बुनियादी ढांचा और ऋण खपाने की कम क्षमता है। बैंकों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे जिलों में अपनी बैंक शाखाओं के कामकाज की समीक्षा करें और वहां कर्ज का प्रवाह बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाएं। संशोधित नियमों के अनुसार, 40 से 60 प्रतिशत के बीच ऋण-जमा अनुपात वाले जिलों की निगरानी, जिला सलाहकार समिति (डीसीसी) द्वारा की जाएगी।

वहीं 40 प्रतिशत से कम ऋण-जमा अनुपात या पिछले वर्ष की वार्षिक ऋण योजना (एसीपी) उपलब्धि 100 प्रतिशत से कम वाले जिलों की निगरानी डीसीसी की एक विशेष उप-समिति द्वारा की जाएगी, जिसके संयोजक लीड जिला प्रबंधक (एलडीएम) होंगे। उप-समिति ऋण-जमा अनुपात में सुधार के लिए कार्य योजनाएं बनाएगी, जिसकी प्रगति की समीक्षा डीसीसी बैठकों में की जाएगी।

जिन जिले में 20 प्रतिशत से कम ऋण-जमा अनुपात होगा उन्हें एक विशेष श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा। ऐसे मामलों में, एक विशेष उप-समिति और कार्य योजना के अलावा, राज्य सरकारों को ऋण देने के लिए सक्षम बुनियादी ढांचे और स्थितियां बनाने के लिए लक्षित प्रयास करने की आवश्यकता होगी जबकि बैंक ऋण वितरण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होंगे। इन जिलों में प्रगति की निगरानी डीसीसी द्वारा की जाएगी और बैंकों के कॉरपोरेट कार्यालयों को हस्तक्षेप के लिए रिपोर्ट किया जाएगा।मसौदे में कहा गया है कि राज्य स्तरीय बैंकर समिति (एसएलबीसी) संयोजक बैंकों को राज्य में सभी गैर-बैंकिंग ग्रामीण केंद्रों (यूआरसी) की एक अद्यतन सूची की पहचान करनी होगी और उसे बनाए रखना होगा।

First Published : February 13, 2026 | 9:47 PM IST