facebookmetapixel
Advertisement
पश्चिम एशिया संकट व कमजोर मॉनसून बढ़ा सकती हैं चिंताएं, चुनौतियों से निपटने के लिए रहें तैयार: वित्त मंत्रालयक्या आपका रिटायरमेंट फंड बुढ़ापे में जीवनभर साथ देगा? जानें बढ़ती उम्र और महंगाई के बीच सुरक्षा का फॉर्मूला10 साल के सबसे खराब मानसून के खतरे के बीच सरकार का बड़ा फैसला, 1 जून से शुरू होगा ‘खेत बचाओ’ अभियानपूरी तरह बदल गया ट्रेंड! क्यों पुराने लॉयल्टी प्रोग्राम्स छोड़ ‘इंस्टेंट डिजिटल रिवॉर्ड्स’ के दीवाने हो रहे युवा?Dividend Stocks: अगले हफ्ते रिलायंस और HDFC AMC समेत 19 कंपनियां बांटने जा रही हैं मुनाफा, चेक करें लिस्टBonus Stocks: निवेशकों की मौज! अगले हफ्ते ये दो कंपनियां बाटेंगी बोनस शेयर, नोट कर लें रिकॉर्ड डेटVedanta का महाप्लान: अगले 3 साल में $20 अरब का निवेश, अनिल अग्रवाल बोले- जोखिम उठाना मेरी आदत‘डिजिटल पेमेंट में एजेंटिक AI के लिए बने मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क’, NPCI प्रमुख दिलीप आसबे का बड़ा बयानमई में 49 लाख बैरल पहुंचा देश का क्रूड इंपोर्ट, रूस से तेल और अमेरिका से गैस का आयात रिकॉर्ड स्तर परसुप्रीम कोर्ट से रिलायंस को बड़ी राहत: SEBI का ₹447 करोड़ का वसूली आदेश रद्द, वापस मिलेंगे ₹250 करोड़

Google पर भारतीयों की पसंद: AI से अध्यात्म तक, कांतार की रिपोर्ट में खुले सर्च के दिलचस्प राज

Advertisement

कांतार की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारतीयों ने एआई, भजन क्लबिंग और जॉब हगिंग जैसे विविध विषयों को जमकर सर्च किया, जो बदलते सामाजिक मिजाज को दर्शाता है

Last Updated- April 07, 2026 | 10:49 PM IST
artificial intelligence (AI)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में क्या कोई एक ही विषय ऐसा हो सकता है जो गूगल पर उसके नागरिकों द्वारा खोजे (सर्च किए गए) गए विषयों पर हावी हो? जाहिर है, नहीं। वर्ष 2025 में ये खोजें संस्कृति से लेकर प्रौद्योगिकी तक और अर्थव्यवस्था से लेकर मनोरंजन तक विविध क्षेत्र में फैली रहीं।

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) रोजमर्रा के बुनियादी ढांचे में प्रवेश कर गया, साथ ही डिजिटल जोखिमों के प्रति सावधानी भी बढ़ी है। अल्फा जेनरेशन वालों की डिजिटल इंटरैक्शन पर उनके माता-पिता का नियंत्रण था जबकि वरिष्ठ नागरिकों के बीच भी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में बढ़ोतरी देखी गई। काम पर अपनी कुशलता को बेहतर बनाना प्राथमिकता बनी रही लेकिन ऑक्यूपेशनल बर्नआउट और माइक्रो रिटायरमेंट यानी थोड़े लंबे समय तक काम से छुट्टी को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ गई।

मार्केटिंग डेटा और विश्लेषण फर्म कैंटार द्वारा आज जारी ‘इंडिया इन सर्च’ 2026 रिपोर्ट में ये कुछ मुख्य रूझान सामने आए। रिपोर्ट के दूसरे संस्करण का विषय था: सर्च भविष्य दिखाता है। कैंटार में दक्षिण एशिया की प्रबंध निदेशक और चीफ क्लाइंट, सॉल्यूशंस अफसर सौम्या मोहंती ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा, ‘खोजें श्रेणी स्तर से आगे बढ़कर सांस्कृतिक प्रक्षेपवक्र बन गईं। कोई भी श्रेणी या ब्रांड-विशिष्ट खोज और निष्कर्ष अधिक विविध नहीं थे।’

एआई को अपनाने से जुड़ी औसत मासिक खोजें 23.5 करोड़ रहीं, जिनमें कंटेंट बनाना, ट्रांसक्राइबिंग टूल और खास तरह के यूटिलिटी टूल शामिल थे। यह पिछले साल के मुकाबले 154 फीसदी बढ़ा है। एआई ने अध्यात्म के क्षेत्र में भी कदम रखा है, जहां ‘महाभारत एआई’ और ‘गीता जीपीटी’ से जुड़ी खोजों में क्रमशः 400 फीसदी और 83 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन परंपराओं को एक नया रूप मिला, जिसमें शादियों के लिए महिला पुजारियों की खोज में 100 फीसदी और नवरात्रि के दौरान उपहार देने की प्रथा की खोज में 267 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे ‘भजन क्लबिंग’ के नए चलन की खोज में पिछले साल की तुलना में करीब 26,900 फीसदी की भारी उछाल देखी गई।

रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है जेन अल्फा (2010-2025) और वरिष्ठ नागरिक किस तरह से डिजिटली संचालित पारिस्थितिकी तंत्र को समझ रहे हैं। जेन अल्फा डिजिटल रूप से सक्षम लेकिन कड़े नियंत्रित वातावरण में बढ़ रहा है, जिसमें सुरक्षित खोज फिल्टर से संबंधित खोजों में 241 फीसदी की वृद्धि और ऐंड्रॉयड पैरेंटल कंट्रोल में 124 फीसदी की वृद्धि हुई है।

मोहंती बताती हैं, ‘बच्चों के लिए इंटरनेट नियमों पर बातचीत के साथ, जेन अल्फा का प्रत्यक्ष संपर्क सीमित हो सकता है। इसलिए सुरक्षित इंटरनेट और पैरेंटल कंट्रोल के बारे में ज्यादा तलाश की जा रही है।’ दूसरी ओर, 40 से अधिक उम्र के लोगों के लिए प्रौद्योगिकी अधिक आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जा रही है। बुजुर्गों के लिए ऐप में 60 फीसदी तक बढ़ गए हैं और ‘आईफोन सीनियर’ की खोजों में 1,000 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है।

भारतीय कर्मचारियों में छंटनी का डर बना हुआ है लेकिन जॉब हगिंग से संबंधित खोज में 2,300 फीसदी, माइक्रो रिटायरमेंट के बारे में 800 फीसदी और व्यावसायिक बर्नआउट से संबंधित तलाश 86 फीसदी बढ़ी है। किसी कर्मचारी द्वारा अपनी वर्तमान नौकरी से असंतुष्ट होने के बावजूद अनिश्चितता और आर्थिक असुरक्षा के डर से उसी नौकरी में टिके रहने को जॉब हगिंग कहा जाता है।

एआई/एमएल पाठ्यक्रमों के बारे में तलाश 49 फीसदी बढ़ गई है। मोहंती कहती हैं, ‘लोग जल्द सुकून पाने, जल्दी सेवानिवृत्त होने आदि जैसे रुझानों के बारे में सोच रहे हैं लेकिन ऐसा वास्तव में नहीं हो रहा है। सही मायने में एआई के दौर में अधिक कुशलता की आवश्यकता है।’

रिपोर्ट के नतीजों से यह भी पता चलता है कि वर्षों तक डिजिटल दुनिया में डूबे रहने के बाद, अब लोग असल जिंदगी के और सामाजिक अनुभव चाहते हैं। ‘मेरे आस-पास एस्केप रूम’,’कॉफी रेव पार्टी’ और ‘लाइव म्यूजिक’ जैसी खोज लोगों को सामाजिक अनुभव लेने और लोगों से मेलजोल करने की इच्छा को जाहिर करती हैं। मोहंती ने कहा, ‘लोग अब ऑनलाइन यह खोज रहे हैं कि वे अपना समय ऑफलाइन कैसे बिता सकते हैं।’ तेज रफ्तार जिंदगी से सुकून वाला जीवन जीने के बारे में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

Advertisement
First Published - April 7, 2026 | 10:17 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement