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पश्चिम एशिया संकट से ऑटो सेक्टर सतर्क: निर्यात और कच्चे माल की लागत पर मारुति-ह्युंडै की पैनी नजर

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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय वाहन कंपनियां निर्यात और बढ़ती इनपुट लागत को लेकर सतर्क हैं, जिससे घरेलू बाजार में कारों की कीमतें और ईवी की मांग प्रभावित हो सकती है

Last Updated- March 03, 2026 | 10:40 PM IST
Cars
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया संकट ने भारतीय वाहन कंपनियों को भी चिंता में डाल दिया है। इस संकट के चौथे दिन में प्रवेश करने के साथ ही वाहन कंपनियां अब सतर्क स्थिति में हैं और इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। मारुति सुजुकी, ह्युंडै मोटर इंडिया और अशोक लीलैंड जैसे बड़ी कंपनियों के अलावा कई वाहन निर्माता अपनी स्थानीय उत्पादन सुविधाओं का उपयोग करके पश्चिम एशिया के देशों जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और अन्य गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों में वाहन निर्यात करते हैं। यहां तक कि मारुति सुजुकी के निर्यात का हिस्सा भी प्रति माह लगभग 3,000 यूनिट्स हो सकता है। इसलिए इसका निर्यात पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

हालांकि एक उद्योग विश्लेषक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ईंधन और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से घरेलू बिक्री पर प्रभाव पड़ सकता है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में वृद्धि भी हो सकती है। मारुति सुजुकी ने कहा कि उसका पश्चिम एशिया में निर्यात का हिस्सा उसके कुल निर्यात का 12.5 प्रतिशत है।

मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती ने कहा, ‘हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, हमारे लिए पश्चिम एशिया एक महत्वपूर्ण निर्यात क्षेत्र नहीं है। वास्तव में हम लगभग 100 देशों में निर्यात करते हैं, और हमने अपने पोर्टफोलियो का इस तरह से विविधिकरण किया है कि यह स्वाभाविक रूप से जोखिम-मुक्त है। इस क्षेत्र में कंपनी मुख्य रूप से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान और कतर को निर्यात करती है।’

निसान मोटर इंडिया ने अपनी चेन्नई सुविधा को एक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित किया है, लेकिन वर्तमान में इसके निर्यात की मात्रा मुख्य रूप से मैग्नाइट कॉम्पैक्ट एसयूवी द्वारा संचालित है, जबकि सनी, माइक्रा और किक्स जैसे मॉडल पहले पश्चिम एशिया सहित विदेशी बाजारों में निर्यात किए जाते थे, अब इनका उत्पादन भारत में बंद कर दिया गया है। वर्तमान में मैग्नाइट को 60 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है, जिसमें कई जीसीसी बाजार भी शामिल हैं। निसान ने हाल ही में ग्रेविट लॉन्च किया है, जिसे पश्चिम एशिया और कई अन्य देशों में निर्यात किया जाएगा।

होंडा कार्स इंडिया अपनी भारतीय संयंत्रों से सिटी, अमेज और एलीवेट जैसे मॉडल्स को कई अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों में, जिसमें पश्चिम एशिया के बाजार भी शामिल हैं, निर्यात करती है। कंपनी ने पिछले कई वर्षों के दौरान अपने निर्यात आधार को मजबूती से विकसित किया है और विदेशी शिपमेंट संयंत्र के उपयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।

स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन इंडिया (जो भारत में स्कोडा और फोक्सवैगन ब्रांड्स के उत्पादन की देखरेख करता है) फोक्सवैगन वर्टस, ताइगुन और स्कोडा कुशाक जैसे वाहनों को विभिन्न वैश्विक बाजारों, जिसमें अरब-गल्फ क्षेत्र भी शामिल है, में निर्यात करता है। समूह ने पिछले कुछ वर्षों में अपने भारतीय ऑपरेशंस से निर्यात का हिस्सा बढ़ाया है, जो इसके व्यापक भारत 2.0 रणनीति का हिस्सा है।

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर भी भारत में निर्मित वाहनों को विदेशों में भेजता है। हालांकि निर्यात की मात्रा अपेक्षाकृत छोटी है। टोयोटा कुछ विशेष भारत-निर्मित मॉडल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों, जिसमें पश्चिम एशिया भी शामिल है, में भेजता है। यह इसके क्षेत्रीय आपूर्ति नेटवर्क का हिस्सा है।  इसी तरह किया इंडिया और टाटा मोटर्स भी भारत में निर्मित वाहनों को विदेशों में निर्यात करते हैं, जिसमें पश्चिम एशिया के बाजार भी शामिल हैं।

किया की एसयूवी पोर्टफोलियो इसके निर्यात मिश्रण में योगदान करती है, जबकि टाटा मोटर्स एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में यात्री और चुनिंदा वाणिज्यिक वाहन शिपमेंट के माध्यम से उपस्थिति बनाए रखता है।

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First Published - March 3, 2026 | 10:29 PM IST

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