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साइबर खतरों से निपटने के लिए सर्ट-इन का ‘AI वॉर रूम’ शुरू, विदेशी AI मॉडलों की कमियों पर रखेगा नजर

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सर्ट-इन ने अत्याधुनिक विदेशी एआई मॉडलों की कमजोरियों को जांचने और स्वदेशी सुरक्षा तंत्र मजबूत करने के लिए एक विशेष ‘एआई वॉर रूम’ शुरू किया है

Last Updated- July 13, 2026 | 10:45 PM IST
Artificial intelligence (AI)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) ने एक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) वॉर रूम शुरू किया है। इसका उद्देश्य ऐसे एआई मॉडलों पर काम करना है, जिनकी क्षमता अत्याधुनिक एआई मॉडलों मसलन एंथ्रोपिक के क्लाउड मिथोस और ओपनएआई के चैटजीपीटी5.6 की क्षमता का करीब 60-70 फीसदी है। यह जानकारी सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने दी।

सर्ट-इन की डिजिटल जोखिम रिपोर्ट के दूसरे संस्करण के लोकार्पण के मौके पर कृष्णन ने कहा, ‘सर्ट-इन ने ऐसे सैंडबॉक्स और परीक्षण वातावरण तैयार किया है जिनमें इन एआई मॉडलों के विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है। साथ ही संभावित कमजोरियों की पहचान की जा रही है ताकि जब भी हमें इन मॉडलों तक पहुंच मिल सके, उससे पहले हम पूरी तैयारी कर चुके हों।’

कृष्णन के मुताबिक इसका उद्देश्य यह भी है कि जब भारतीय कंपनियों और सरकारी एजेंसियों को इन अत्याधुनिक एआई मॉडलों तक निर्बाध पहुंच मिले तब तक उनकी संभावित कमजोरियों और आवश्यक सुरक्षा सुधारों  की पहले से पहचान और तैयारी की जा चुकी हो। उन्होंने कहा कि यह एआई वॉर रूम इस बात को भी सुनिश्चित करेगा कि स्वदेशी एआई मॉडलों और सुरक्षा तंत्र के विकास का एक बड़ा हिस्सा इन विदेशी, सामान्य-उद्देश्य वाले अत्याधुनिक एआई मॉडलों पर अत्यधिक निर्भर हुए बिना किया जा सके।

कृष्णन ने कहा, ‘जोखिम तो है। सरकार की चिंता यह है कि हमें इन मॉडलों तक पहुंच मिलनी चाहिए। लेकिन संवेदनशील सूचनाओं का प्रसंस्करण सरकार के अपने परिसरों में ही किया जाएगा।’

भारत में एंथ्रोपिक के नवीनतम सामान्य-उद्देश्य वाले मॉडल क्लाउड मिथोस तक प्रारंभिक पहुंच केवल कुछ सरकारी एजेंसियों को दी गई थी। इनमें भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन), नैशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) और दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) शामिल थे। यह व्यवस्था ग्लासविंग प्रोजेक्ट के विस्तार के तहत की गई थी।

यद्यपि बाद में अमेरिका द्वारा विदेशी नागरिकों की क्लाउड मिथोस तक पहुंच पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह सुविधा रोक दी गई। कृष्णन ने बताया कि भारत सरकार इन मॉडलों तक भारत की पहुंच बहाल कराने के लिए अमेरिका की संबंधित एजेंसियों और संबंधित कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है।

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First Published - July 13, 2026 | 10:31 PM IST

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