यहां एसोचैम के एक कार्यक्रम में वर्मा ने कहा, इस्पात उद्योग के समक्ष कुशल कर्मियों की भारी किल्लत की समस्या आ सकती है। वर्तमान में भारत की इस्पात उत्पादन क्षमता करीब 9 करोड़ टन सालाना है जिसे 2025 तक तीन गुना कर 30 करोड़ टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
वर्मा ने कहा कि अनुमान के मुताबिक 2025 तक घरेलू इस्पात उद्योग में 105 लाख कुशल कर्मचारियों की मांग होगी, जबकि आपूर्ति 41 लाख की ही होगी।