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पीथमपुर ऑटो उद्योग की तेजी पर लगा ब्रेक

Last Updated- December 11, 2022 | 12:45 AM IST

मध्य प्रदेश का पीथमपुर ऑटो उद्योग डूबने के कगार पर आ गया है। उद्योग को या तो बजटीय सुधार, नई ऋण योजनाएं या फिर किसी तरह का पुनरुद्धार ही संकट से उबार सकता है।
दरअसल, पीथमपुर को डेट्रॉइट ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है पूरे साल इसके लिए हालात खराब ही बने रहे हैं। मंदी में सबसे अधिक मार बड़ी ऑटो कंपनियों पर पड़ी है जिनका उत्पादन 40 फीसदी तक घट गया है। शहर में ऑटो से जुड़े लघु और मझोले उद्योगों का भी हाल बहुत बुरा है।
हालांकि मार्च का महीना उद्योग को थोड़ा राहत देने वाला था पर बावजूद इसके सहायक इकाइयों को बड़े नुकसान से बचाना मुश्किल था। पीथमपुर ऑटो उद्योग को मुख्य रूप से ऑटो संबंधित सहायक इकाइयों और व्यावसायिक वाहन उत्पादन इकाइयों के लिए जाना जाता है। इसके अलावा ब्रेक पाइप, ईंधन पाइप और स्वचालित गियर के उत्पादन में भी पीथमपुर का खासा योगदान रहा है।
इस इलाके में जो बड़ी ऑटो कंपनियां हैं उनमें वी ई कमर्शियल व्हीकल लिमिटेड, फोर्स मोटर्स और मैन फोर्स लिमिटेड शामिल हैं। सियाम की ओर से जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि कुल मिलाकर पूरे व्यावसायिक वाहन क्षेत्र को तगड़ा नुकसान पहुंचा है। आयशर मोटर्स ने 2007-08 में 2,222 मझोले और भारी व्यावसायिक वाहनों का निर्माण किया।
वहीं 2008-09 में यह उत्पादन घटकर 1,775 वाहन रह गया। इसी तरह मालवाहक वाहनों की संख्या 2007-08 के 21,667 की तुलना में 2008-09 में घटकर 12,299 रह गई। मार्च  में वाहन क्षेत्र की कंपनियों को अपेक्षाकृत अधिक मांग देखने को मिली। इस दौरान कंपनी ने 1,343 मालवाहक और 162 यात्रीवाहक वाहनों का उत्पादन किया।

First Published - April 15, 2009 | 10:33 PM IST

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