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‘हमारे पास होगा टूथब्रश का 60-70 फीसदी बाजार’

Last Updated- December 05, 2022 | 5:23 PM IST

विज्ञापनों ने ओरल केयर उत्पादों की मांग में काफी इजाफा कर दिया है। इसके चलते ओरल केयर उद्योग अब 75 प्रतिशत की उछाल के साथ 7000 करोड़ रुपये तक पहुंचने को आतुर है।


ब्रांडेड टूथब्रश की मांग में भी 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा रही है। मौजूदा माहौल में जेएचएस सेवेंडगार्ड लेबोरेट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक निखिल नंदा दावा करते हैं कि उनकी कंपनी 2012 तक 170 करोड़ यूनिट के टूथब्रश मार्केट में 60 से 70 प्रतिशत की हिस्सेदारी हथिया लेगी। नंदा से उनकी कंपनी की योजनाओं के संदर्भ में बात की आशीष सिन्हा ने।


भारत में ओरल केयर उत्पादों के बाजार का मौजूदा आकार और टूथपेस्ट की खपत कितनी है? चीन केसाथ तुलना करते हुए बताइए?
भारत में ओरल केयर उद्योगों का कारोबार 4000 करोड़ रुपये का है जबकि चीन में यह उद्योग लगभग 11,000 करोड़ रुपये का है। भारत में ओरल केयर के आधुनिक उत्पाद कम ही हैं। यहां औसतन टूथपेस्ट का प्रति व्यक्ति उपभोग भी कम है, जो कि लगभग 110 ग्राम होगा।


ग्रामीण क्षेत्रों में लोग दांत साफ करने के लिए नीम के दातुन, नमक, राख और कु छ दूसरी प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते हैं। केवल 7 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो दिन में दो बार ब्रश करते हैं जबकि चीन में इसकी तुलना में 61 प्रतिशत लोग ऐसा करते हैं। हालांकि मेरा मानना है कि अगले पांच सालों में यह तस्वीर बदलेगी।


फिलहाल भारत में टूथब्रश की कितनी आपूर्ति हो रही है और अगले पांच सालों में यह आंकड़ा कहां तक जाएगा? इस बढ़ोतरी के पीछे की वजहें भी बताइए?
अभी भारत में लगभग 70 करोड़ यूनिट टूथब्रश की बिक्री होती है, जिसमें हमारी कंपनी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है। मुझे लगता है कि लोगों में टूथब्रश से दांत साफ करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होने की वजह से इसकी मांग बढ़ रही है। इस लिहाज से जल्द ही यह 170 करोड़ यूनिट तक पहुंच जाएगा। वजह साफ है, लोगों में विज्ञापनों के जरिए जागरूकता बढ़ना।


2012 तक आपका कारोबार कितना होगा?
2012 तक अधिकतम उपयोग के आधार पर हमारा बिक्री कारोबार 250 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। हमारी आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा देश में तेजी से खुलतीं बड़ी खुदरा चेनों को किया जाएगा।


संगठित खुदरा क्षेत्रों का इसमें क्या योगदान है?
संगठित खुदरा क्षेत्रों का विकास होने और इन खुदरा कारोबारियों में प्राइवेट लेबल उत्पादों की जरूरत की वजह से हमारी बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। अभी संगठित खुदरा क्षेत्रों से बिक्री उतनी नहीं है फिर भी हमारी उम्मीदें किसी परंपरागत जनरल स्टोर के मुकाबले इनसे अधिक हैं। हमारे विकास में टैक्स फ्री इकाइयों की भी भूमिका काफी है।

First Published - March 31, 2008 | 12:11 AM IST

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