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करदाताओं पर निशाना

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 2:30 AM IST

आयकर विभाग और कुछ निर्धारितियों के बीच का ताजा विवाद सुधार उपायों के इरादों और क्रियान्वयन के बीच के अंतर का अच्छा उदाहरण है। कई व्यक्तियों और कंपनियों ने विभिन्न अदालतों में याचिका दायर करके उन कर नोटिस को चुनौती दी है जो अप्रैल-जून तिमाही में जारी किए गए थे। संबंधित कानून में उससे पहले संशोधन किया गया था जिसके तहत कर आकलन को सामान्य तौर पर तीन वर्ष तक ही दोबारा खोलने की इजाजत दी गई। गंभीर धोखाधड़ी और 50 लाख रुपये से अधिक की आय की चोरी के मामलों में कर विभाग 10 वर्ष तक आकलन के मामले दोबारा जांच सकता है। हालांकि आय कर विभाग ने पुराने कानून की मियाद 30 जून तक बढ़ा दी जिसमें छह वर्ष तक के मामले दोबारा खोलने की इजाजत थी और इसके चलते बड़ी तादाद में निर्धारितियों को कर नोटिस जारी किए गए।
कर विभाग ने दलील दी कि उसने पुराने कानून की अवधि कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण बढ़ाई और यह अनुपालन के संदर्भ में निर्धारितियों को दिए गए विस्तार के अनुरूप ही है। खबर है कि अगर न्यायालय आय कर विभाग के नोटिसों की वैधता के खिलाफ निर्णय देता है तो सरकार अध्यादेश लाने का विकल्प भी तलाश रही है। सरकार के लिए बेहतर होगा कि वह ऐसा कोई कदम उठाने से बचे क्योंकि यह कानून में संशोधन और कर प्रशासन में सुधार की बुनियादी भावना के खिलाफ होगा। कानून में संशोधन का लक्ष्य था बीते वर्षों के कर आकलन के मामले दोबारा खुलने की संभावना कम करके करदाताओं को राहत पहुंचाना। ऐसे में पुराने प्रावधानों को तीन महीने तक बढ़ाना यही दर्शाता है कि कानून के शब्दों और भावना में भेद है। बहरहाल, इसे समझना बहुत मुश्किल नहीं है और यह देश के कर प्रशासन की गहरी कमियों का परिणाम है।
देश की राजकोषीय स्थिति वर्षों से खराब है और महामारी ने समस्या को और गंभीर कर दिया है। बुनियादी मुद्दा है कर अधिकारियों पर राजस्व संग्रह का लक्ष्य हासिल करने का अतिरिक्तदबाव। यह दबाव कर नोटिस, रिफंड में देरी, पिछले मामलों को दोबारा खोलने और विवादों के रूप में सामने आता है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 9 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष कर राजस्व विभिन्न वाद में उलझा हुआ है और सरकार ने विवाद से विश्वास योजना के तहत एक लाख करोड़ रुपये मूल्य के मामलों का निपटारा किया है। कर विभाग के दावों से अदालत में निपट रही करदाताओं की बड़ी तादाद अगर निपटारे के लिए आगे नहीं आई है तो इसका अर्थ है कि उनका मामला मजबूत है।
हालिया अतीत में सरकार ने कई सुधारों को अंजाम दिया है। मसलन पारदर्शिता बढ़ाने और प्रताडऩा कम करने के लिए फेसलेस (बिना मानव संपर्क के) निर्धारण और अपील को अपनाना। मामलों को दोबारा खोलने की संभावना कम करने संबंधी बदलाव भी इसी दिशा में एक कदम था। परंतु करदाताओं की स्थिति में वास्तविक सुधार के लिए शीर्ष नेतृत्व को कर राजस्व के ऐसे लक्ष्य तय करने होंगे जो हकीकत के करीब हों। उसे कर अधिकारियों पर संग्रह बढ़ाने का दबाव भी कम करना होगा ताकि नोटिसों और कानूनी मामलों का बोझ कम हो। कहने का अर्थ यह नहीं है कि कर विभाग कर वंचना करने वालों को नहीं पकडऩा चाहिए बल्कि उसे और अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके लिए कर विभाग को तकनीक का इस्तेमाल करके क्षमता विकसित करनी होगी ताकि वह सही निर्धारितियों से संपर्क कर सके। वृहद स्तर पर राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार को तकनीक के सहारे कर दायरा बढ़ाना होगा। सरकार व्यक्तिगत आय कर की रियायत सीमा पर पुनर्विचार करके भी अच्छा करेगी। पुराने कानून की मियाद बढ़ाकर तथा उन्हीं करदाताओं का पीछा करके सरकार बहुत प्रगति नहीं कर पाएगी।

First Published : July 22, 2021 | 11:24 PM IST