Editorial: प्राथमिकता ऋण ढांचे की हो समीक्षा
प्राथमिकता क्षेत्र का ऋण (पीएसएल) लंबे समय तक भारत के वित्तीय समावेशन के प्रमुख उपायों में से एक था। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) द्वारा जारी एक कार्यपत्र ने इस बात का मूल्यांकन किया कि क्या निर्देशित ऋण अब भी सार्थक विकासात्मक परिणाम देता है। साल 2020 से 2025 के बीच […]
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नए किस्म के पर्यावरणवाद की आवश्यकता, क्यों टिकाऊ विकास की शुरुआत समावेशिता से होनी चाहिए?
हर वर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम कहां खड़े हैं और हमें किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इस वर्ष जब मैं यह आलेख लिख रही हूं मेरा शहर दिल्ली जल रहा है। यह एक जीवित अग्निकुंड बन चुका है। हम सभी […]
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मितव्ययिता सही पर उससे ज्यादा असरदार होंगे सुधार, 10 गुना से ज्यादा बचत संभव
ईंधन कीमतों पर बढ़ते दबाव तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लग रहे झटकों के बीच प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों मितव्ययिता का जो आह्वान किया था उसको गलत ठहराना मुश्किल है। अन्य चीजों के अलावा उन्होंने नागरिकों से कहा था कि वे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करें। उन्होंने किसानों से […]
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Editorial: हादसों के पीछे छिपे भ्रष्टाचार और लापरवाह शहरी शासन की कहानी
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) 22 (14 विदेशी नागरिकों सहित) लोगों की मौत के बाद सक्रिय हो गया है। ये मौतें दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में बेड ऐंड ब्रेकफास्ट (बीऐंडबी) होटल में आग लगने से हुई थीं। इससे जुड़ी सार्वजनिक स्मृति और आधिकारिक उत्साह जल्द ही कम हो जाएगा। लेकिन इस तरह की सिलसिलेवार त्रासदियों […]
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