हमारे जीते-जी शायद ही कोई तकनीक इतनी तेजी से आगे बढ़ी हो, जितनी तेजी से आज आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) बढ़ रही है। ओपनएआई का चैटजीपीटी 2023 की शुरुआत में जब पहली बार लोगों के सामने आया था तब पहले के टेक्स्ट चैटबॉट्स की तुलना में इसे बहुत आगे माना गया। मगर केवल तीन वर्ष में यह और इससे होड़ करने वाले मॉडल ऐसे हो गए हैं कि पहचानना ही मुश्किल है।
अभी किसी को नहीं पता कि इन मॉडलों की बढ़ती क्षमता का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। मगर इतना स्पष्ट है कि लोक नीति और आर्थिक सुरक्षा के मामले में वे 2030 के दशक की समस्या नहीं हैं बल्कि आज की समस्या हैं। इसका अहसास तब ज्यादा हुआ, जब खबर आई कि अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने एआई कंपनी एंथ्रॉपिक से कहा कि वह अमेरिकी नागरिकों के अलावा बाकी किसी को भी अपने सबसे आधुनिक मॉडल फेबल 5 और मिथॉस 5 इस्तेमाल नहीं करने दे। इस आदेश को लागू करना नामुमकिन था क्योंकि एंथ्रॉपिक में ही कई गैर अमेरिकी इन मॉडलों पर काम कर रहे हैं। यह आदेश कुछ ऐसा ही था, जैसे किसी बड़ी कंपनी से अपना नया-नवेला मॉडल बंद करने को कह दिया जाए।
बातचीत के बाद कुछ राहत दी और अधिक सुरक्षा प्रावधानों के साथ फेबल 5 के निर्यात पर पाबंदियां हटा ली गईं मगर मिथॉस 5 पर अब भी रोक है। हां, कुछ चुनिंदा साझेदारों को इसके इस्तेमाल की इजाजत है किंतु इसकी कुछ क्षमताएं सुरक्षा कारणों से बंद कर दी गई हैं। जिन्हें इस्तेमाल की इजाजत है, उन्हें बदले में कड़ी शर्तें माननी पड़ेंगी, जिनसे इसका एक हद तक ही इस्तेमाल हो सकता है।
इन मॉडल की वास्तविक क्षमता की जानकारी बहुत कम है। हालांकि कहा जा रहा है कि मिथॉस 5 ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की उच्च स्तरीय क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा भी भेद डाली है। बताया जाता है कि एंथ्रॉपिक ने पेंटागन द्वारा इस तकनीक के इस्तेमाल पर कुछ नैतिक सीमाएं तय करने की कोशिश की थी। हो सकता है कि इससे नाराज होकर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एंथ्रॉपिक पर दबाव बनाने के लिए यह यह कदम उठाया हो। मान लें ऐसा हुआ था तो भी इससे एंथ्रॉपिक की शानदार मार्केटिंग हो गई। ऐसी ही कई कहानियों ने मिथॉस 5 की छवि भी रहस्यमयी बना दी है।
फिर भी एक गंभीर प्रश्न बना हुआ है। भविष्य में मिथॉस 5 या एंथ्रॉपिक अथवा किसी दूसरी अमेरिकी कंपनी से आया उसका कोई उन्नत रूप इतनी ज्यादा क्षमता या खतरा दिखाए, जैसा इतिहास में परमाणु हथियार के विकास जैसी कुछ मौकों पर ही दिखा था तो अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या होगी? और दुनिया के दूसरे देश इस पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे?
साफ तौर पर अमेरिकी प्रशासन को लगता है कि नए मॉडल से अपनी सुरक्षा को होने वाले खतरे को वह पहले ही भांप और आंक सकता है। उसे यह भरोसा भी है कि जरूरत पड़ने पर वह किसी भी मॉडल पर कारगर ढंग से रोक लगा देगा। वह मानता है कि एआई कंपनियां सरकारी निर्देशों का पालन करेंगी, तकनीक बाहर नहीं जाएगी और न ही उसकी नकल बनाई जा सकेगी। मगर ये काफी कठिन धारणाएं हैं।
अत्याधुनिक एआई मॉडल तैयार करने की क्षमता देखें तो अमेरिका को टक्कर केवल चीन देता है। (यूरोप में इस क्षेत्र में अग्रणी मानी जाने वाली फ्रांस की कंपनी मिस्ट्राल हाल के महीनों में काफी पीछे रह गई है।) चीनी एआई मॉडलों को शुरुआत में मोटे तौर पर ओपन-सोर्स और आसानी से अपनाए जाने लायक बताया गया था। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं रहेगा। हाल ही में प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ चीन के वाणिज्य मंत्रालय की बैठकें होने की खबर आई। बैठक यह समझने के लिए थी कि क्या चीन के सबसे आधुनिक एआई मॉडलों पर भी कुछ बंदिशें खास तौर पर निर्यात बंदिशें लगाई जा सकती हैं।
रॉयटर्स की एक खबर के अनुसार चीनी अधिकारी इस बात पर भी नियंत्रण रखना चाहते हैं कि देश में एआई से जुड़े स्टार्टअप में कौन निवेश करेगा। यह बात तब सामने आई, जब चीन के एआई स्टार्टअप मैनस को खरीदने के लिए मेटा की लगभग 2 अरब डॉलर की बोली रोक दी गई और चीन ने मूनशॉट एआई को आदेश दिया कि विदेशी वेंचर कैपिटल लेने से पहले उसे सरकार से इजाजत लेनी होगी। कुछ महीने पहले चीन के कानून विशेषज्ञों ने मिलकर एआई पर केंद्रित नया आर्थिक सुरक्षा कानून बनाने का प्रयास भी किया, जिसके जरिये सरकार अत्याधुनिक एआई प्रणाली को केवल देश के भीतर जारी होने देगी या जरूरत पड़ने पर उसे आम जनता की पहुंच से बिल्कुल दूर कर देगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि एआई के लिहाज से दो प्रमुख देशों अमेरिका और चीन में बढ़ती पाबंदियां आर्थिक राष्ट्रवाद का परिणाम हैं या वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता के कारण हैं। हम जानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा चिंता के नाम पर लगाए गए कई व्यापार प्रतिबंध असल में अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने के लिए थे। लेकिन यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि एआई संबंधी प्रतिबंधों की वजह भी आर्थिक होड़ ही है। खास तौर पर सस्ते मॉडलों के जरिये अब तक अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाता आया चीन अगर प्रतिबंध लगाने वाली उलटी चाल चल रहा है तो निश्चित रूप से सुरक्षा के लिए चिंताएं मौजूद हो सकती हैं।