Editorial: सरकारी आंकड़ों के लिए देश का पहला AI चालित साझा डेटा मंच बेहद जरूरी कदम
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) अपनी तरह का पहला साझा डेटा मंच (सीडीपी) बनाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही वह आधिकारिक आंकड़ों के लिए एक समर्पित एआई चालित लार्ज लैंग्वेंज मॉडल (एलएलएम) बनाने की योजना बना रहा है जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और राष्ट्रीय लेखा प्रभाग से लगभग 300 आधिकारिक डेटासेट को […]
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विकसित भारत के लिए नीतियों और अभियानों से ज्यादा गतिशील संस्थाओं की जरूरत
भारत एक दुर्लभ मोड़ पर खड़ा है। अगले 10 से 15 वर्षों तक उसके पास सतत समृद्धि हासिल करने और एक उच्च आय वाला देश, एक विकसित भारत, बनने के अपार अवसर हैं। तीन अवसर खुले हैं, और एक-दो दशक में तीनों ही समाप्त हो जाएंगे। ये हैं- जनसंख्या का अवसर: 2030 के दशक के […]
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IBC में हितों का टकराव: खुद फैसला लेने वाले वित्तीय ऋणदाताओं को फायदा, परिचालन ऋणदाता बेआवाज
दिवालिया कानून सुधार समिति यानी बीएलआरसी, विधायिका और न्यायपालिका ने लगातार एक ही प्रस्थापना को मजबूत किया है और वह यह कि भारतीय दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत कॉरपोरेट दिवालिया निस्तारण प्रक्रिया (सीआईआरपी) वित्तीय ऋणदाताओं से संबंधित है। उनकी व्यावसायिक समझ सर्वोपरि है और उस पर शायद ही कोई सवाल उठाया […]
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जनधन और UPI से तो बढ़ा वित्तीय समावेशन, लेकिन शेयर बाजार व म्यूचुअल फंड की समझ में अभी भी देश पीछे
हाल में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6), 2023-24 में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से संबंधित उत्साहजनक खबर सामने आई है। एनएफएचएस -5 (2019-21) और एनएफएचएस -6 के दरमियान चार वर्षों में काम करने वाली और नकद वेतन पाने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी राष्ट्रीय स्तर पर 5 फीसदी अंक से अधिक बढ़कर 30.8 फीसदी हो […]
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