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लेखक : राघव पांडेय

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

IBC में हितों का टकराव: खुद फैसला लेने वाले वित्तीय ऋणदाताओं को फायदा, परिचालन ऋणदाता बेआवाज

दिवालिया कानून सुधार समिति यानी बीएलआरसी, विधायिका और न्यायपालिका ने लगातार एक ही प्रस्थापना को मजबूत किया है और वह यह कि भारतीय दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत कॉरपोरेट दिवालिया निस्तारण प्रक्रिया (सीआईआरपी) वित्तीय ऋणदाताओं से संबं​धित है। उनकी व्यावसायिक समझ सर्वोपरि है और उस पर शायद ही कोई सवाल उठाया […]

आज का अखबार, लेख

बचाव, पुनरुद्धार और सुधार: IBC के पहले दशक ने भारत की क्रेडिट संस्कृति को बदला

भारत जब बाजार अर्थव्यवस्था बना कारोबारी चक्र की गतिविधियां – विस्तार, मुश्किल और विफलता भी स्वाभाविक रूप से आ गईं। वृद्धि के दौर में बनी कई कंपनियां होड़ गहरी होने पर कदमताल नहीं कर पाईं। वे होड़ में पिछड़ गईं, आर्थिक रूप से काम की नहीं रहीं मगर निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के […]

आज का अखबार, लेख

IBC: संकट में फंसी कंपनियों का ‘समाधान’ या कर्ज वसूली का नया ‘हथियार’?

ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी), 2016 का उद्देश्य उस तरीके में निर्णायक बदलाव करना था जिसमें कॉरपोरेट संकट के समय लेनदारों की ज्यादा चलती थी और नियमों को सख्ती से लागू करने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था। इसे एक ऐसे ढांचे के रूप में तैयार किया गया था जिसमें उन व्यवसायों को बचाया […]

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