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तनाव बढ़ने की संभावना और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से टूटा रुपया, डॉलर के मुकाबले 95.66 के स्तर पर बंद

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अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पहुंचने से रुपया मंगलवार को 0.48% गिरकर डॉलर के मुकाबले 95.66 पर बंद हुआ

Last Updated- May 26, 2026 | 10:40 PM IST
Rupee vs Dollar
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

लगातार तीन दिनों तक बढ़त बनाने के बाद मंगलवार को रुपया कमजोरी के साथ बंद हुआ। इसकी वजह ईरान पर नए हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें बढ़ना थीं। सोमवार को 7 फीसदी से ज्यादा गिरने के बाद ब्रेंट क्रूुड ऑयल की कीमत फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई है क्योंकि अमेरिकी सेना ने मिसाइल लॉन्च वाली साइटों और होर्मुज स्ट्रेट के पास माइंस बिछाने की कोशिश कर रही नावों पर हमला किया।

भारतीय मुद्रा 95.66 प्रति डॉलर पर बंद हुई। यह पिछले बंद स्तर 95.23 प्रति डॉलर से 0.48 फीसदी कम है। मई में डॉलर के मुकाबले रुपया 0.8 फीसदी कमजोर हुआ है। निजी बैंक के एक डीलर ने कहा, हाल में रुपया करीब 97 के स्तर से बढ़कर 95 के करीब पहुंच गया है। इसकी मुख्य वजह वैश्विक बाजार में बेहतर जोखिम सेंटिमेंट, आरबीआई का दखल और कुछ कंपनियों का डॉलर बेचना है। लेकिन अभी भी वैश्विक अनिश्चितता बरकरार है। इसका असर जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ रहा है। इस अनिश्चतता से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपये पर दबाव बढ़ गया।

डीलरों ने बताया, हालांकि आरबीआई 95.40–95.45 के स्तर को बचाने के लिए सक्रिय था। लेकिन बाद में उसने बाजार में कोई दखल नहीं दिया, जिससे भी रुपये में गिरावट आई होगी। दिन के दौरान स्थानीय मुद्रा मजबूत होकर 95.34 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई थी। डॉलर इंडेक्स 0.06 फीसदी बढ़कर 99.05 पर पहुंच गया और मंगलवार को एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल हो गईं। ऐसा उन खबरों के बाद हुआ, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हमले किए हैं।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने रात में ईरान पर हमला किया। यह लड़ाई अभी तक सुलझ नहीं पाई है। होर्मुज स्ट्रेट अभी भी बंद है, सिवाय कुछ जहाजों के, जिन्हें ईरान ने निकलने की इजाज़त दी है। तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने के कारण रुपया गिरकर 95.68 पर आ गया। डॉलर इंडेक्स 99.07 पर स्थिर रहा। आरबीआई 99.45 के स्तर को पूरी ताकत से बचा रहा था। लेकिन पूरे दिन लगातार मांग बनी रहने और तेल की कीमतें बढ़ने के बाद उसने अचानक इस स्तर को छोड़ दिया।

2026 में रुपया करीब 6 फीसदी कमजोर हुआ। फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से यह गिरावट और तेज हो गई। युद्ध और उसके बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की आपूर्ति में रुकावट आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से भारत की बाह्य स्थिति और खराब होने का खतरा है क्योंकि देश अपनी तेल की ज़रूरतों का करीब 80 फीसदी हिस्सा आयात करता है।

एएनजेड रिसर्च ने एक नोट में कहा, तेल की ऊंची कीमतें चालू खाते के बड़े घाटे के जरिये बाहरी फंडिंग की जरूरतों को और बढ़ा रही हैं। अगर तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो वित्त वर्ष 27 में यह घाटा जीडीपी के 1.9 फीसदी तक पहुंचने की संभावना है। नोट में यह भी कहा गया है कि यह घाटा वित्त वर्ष 26 के लिए जीडीपी के 0.8 फीसदी के अनुमान से दोगुना से भी ज्यादा है। 

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First Published - May 26, 2026 | 10:34 PM IST

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