ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) ने वाहन उद्योग की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) की गणना के लिए वित्त वर्ष 27 में विदेशी मुद्रा विनिमय की दो निश्चित दरों का इस्तेमाल करने का अपना प्रस्ताव वापस लेने पर सहमति जताई है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को पता चला है कि ऑडिट की मुश्किलों और कागजी काम बढ़ने की वजह से वाहन कंपनियों के विरोध के बाद एआरएआई ने यह फैसला लिया है।
25 जून को कार कंपनियों के साथ हुई बैठक में एआरएआई पूरे वित्त वर्ष 27 के लिए एक ही सुझाई गई विनिमय दर अपनाने पर सहमत हो गया। यह फैसला एआरएआई के उस प्रस्ताव के एक सप्ताह से भी कम समय बाद आया है, जिसमें साल के दौरान दो अलग-अलग निश्चित विनिमय दरों का इस्तेमाल करने की बात कही गई थी।
डीवीए किसी वाहन के मूल्य का वह हिस्सा (राजस्व के लिहाज से) होता है, जो भारत में ही सृजित किया गया हो। वाहन पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन पाने के लिए किसी वाहन के मॉडल में आम तौर पर कम से कम 50 प्रतिशत डीवीए जरूरी होता है। यानी वाहन की एक्स-फैक्टरी कीमत में विदेशों से आयात की गई चीजों का मूल्य 50 प्रतिशत से कम होनी चाहिए।
पिछले एक साल में रुपये की कीमत में काफी गिरावट आ चुकी है, खासकर 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में शुरू हुए टकराव के बाद, जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे।