निजी इंफ्रा निवेश की वापसी को संस्थागत रूप से तैयार हो भारत
पीपीपी यानी सार्वजनिक-निजी भागीदारी अब देश के बुनियादी ढांचा विकास में निजी निवेश का संकेत देने वाला एक स्वीकृत संक्षिप्त रूप बन चुका है। भारत के ब्रिटिशकालीन बुनियादी ढांचे के निर्माण में कई परियोजनाएं निजी उपक्रमों के रूप में सामने आई थीं। गारंटीशुदा रिटर्न वाले स्टर्लिंग बॉन्ड्स ने रेलमार्ग, ट्रामवे और बिजली वितरण को वित्तपोषित […]
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मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों के नियमों पर भी हो संसदीय निगरानी
कल्पना कीजिए कि एक सामान्य रूप से प्रयोग में लाई जाने वाली एल्गोरिद्म आधारित कारोबारी रणनीति को अचानक चालबाजी घोषित कर दिया जाए। इसके अत्यंत गंभीर परिणाम हो सकते हैं। मसलन दंड, निलंबन और यहां तक कि आपराधिक कार्रवाई भी। यदि संसद या भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) इस प्रकार का वर्गीकरण करता तो […]
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Editorial: तेल की कीमतें घटीं, अब विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने पर जोर
अनिश्चितता के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की शुरुआत विश्व अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत है। हालांकि होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य अभी भी अस्पष्ट है लेकिन अब तक की प्रगति के परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें मई की शुरुआत के उच्च स्तर से 30 […]
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रुपये की कमजोरी की जड़ें कहीं गहरी, सिर्फ तेल और पश्चिम एशिया संकट नहीं जिम्मेदार
देश के नीति निर्धारकों ने रुपया संभालने के लिए 5 जून को कुछ महत्त्वपूर्ण उपायों की घोषणा की। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जिन उपायों का ऐलान किया उनमें विदेश से ऋण लेने वाली सरकारी कंपनियों को सब्सिडी, प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए डॉलर- जमा योजना का नया संस्करण (जो आखिरी बार वर्ष 2013 में […]
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